ALL कविता लेख गीत/गजल समाचार कहानी/लघुकथा समीक्षा/पुस्तक चर्चा दोहा/छंद/हायकु व्यंग्य विडियो
यह कैसा ...... वैशाख
April 13, 2020 • प्रीति शर्मा 'असीम' • कविता

*प्रीति शर्मा 'असीम'
 
जिंदगी की बैसाखियों पर,   
चलकर ..............यह आज,
कैसा ..........वैशाख  आया।
 
न आज भांगड़े हैं।
न मेले सजे हैं ।
 
फसल कटने -काटने का ,
किसे ख्याल आया।।
 
ज़िंदगी की बैसाखियों पर,   
चलकर आज,
कितना मजबूर वैशाख आया।
 
गेहूँ की फसल का ,
घर के ,
आंगन में आज न ढेर आया ।
 
वह मेलों की रौनक को ,
आज मैंने घरों में बंद पाया।
 
दिहाड़ी -दार अपना दर्द ,
ढोल की तान पर ना भूल पाया।
 
 जिंदगी की बैसाखियों पर, 
चलकर यह कैसा वैशाख आया।
 
 वह हल्की गर्म हवाओं के साथ, 
 न तेरी धानी चुनर का,
 पैगाम आया ।
 
यह कैसा ,
उदास,ऊबा हुआ वैशाख आया।
 
*प्रीति शर्मा  असीम
 नालागढ़ हिमाचल प्रदेश
 

साहित्य, कला, संस्कृति और समाज से जुड़ी लेख/ रचनाएँ/ समाचार अब नये वेब पोर्टल  शाश्वत सृजन पर देखे-  http://shashwatsrijan.com