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याद अब भी आता है गांव
April 11, 2020 • अशोक 'आनन '  • गीत/गजल

*अशोक 'आनन ' 
 
याद 
अब भी आता है -
गांव ।
 
ज़िंदगी की सरल - सी परिभाषा ।
    हृदय  , आतिथ्य की अभिलाषा ।
         निश्चल  मन  और  जीवन  सादा -
               प्रेम  सनी मीठी शहदीली भाषा ।
 
पितृ - सम 
घनी -
बरगदी छांव ।
 
 
लिपे - पुते आंगन तुलसी के चौरे ।
    वे अक्षती - कुमकुमी उजली भोरें ।
         दहकी  सुर्ख  पलाशी - सी वे शामें -
               नदियों की झुकी कजरारी वे कोरें ।
 
 
नद
पार करातीं -
नेह - नाव ।
 
आंगन की वे सतरंगीअल्पनाएं ।
      संजा  की  नई - नई कल्पनाएं ।
           गीत   गाते   वे  अल्हड़  मौसम -
                  केसर सम  महकतीं वे वंदनाएं ।
 
धूल में सने
मखमली -
पांव ।
 
*अशोक 'आनन ' 
 मक्सी,जिला -शाजापुर (म. प्र)
 

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