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विवेकानंद सरकारी महाविद्यालय में हिन्दी दिवस पर वेबिनार सम्पन्न
September 15, 2020 • ✍️सरिता सुराणा • समाचार
विवेकानंद सरकारी महाविद्यालय, हैदराबाद के हिन्दी विभाग के तत्वावधान में दिनांक 14 सितम्बर, 2020 सोमवार को वेबिनार के माध्यम से हिन्दी दिवस मनाया गया। इस वेबिनार संगोष्ठी की संयोजक डॉ. एच के वंदना ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि आज हिन्दी भाषा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही है। अनेक विश्वविद्यालयों में हिन्दी भाषा के अध्ययन की सुविधा उपलब्ध है। हमारे देश में सर्वोच्च न्यायालय, संसद और अन्य सरकारी कार्यालयों के कामकाज में हिन्दी भाषा का प्रयोग प्रारम्भ हो गया है। इस वेबिनार की अध्यक्षता विवेकानंद सरकारी महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. सुकन्या ने की। इस अवसर पर दक्षिण भारत के प्रसिद्ध हिन्दी नाटककार एमिरेट्स प्रोफेसर प्रदीप कुमार ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। डॉ.संगीता कोटिया, अध्यक्ष हिन्दी विभाग, पी जी कालेज सिकंदराबाद एवं श्रीमती सरिता सुराणा, वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखिका ने विशेष अतिथि के रूप में अपने विचार रखे। आदिलाबाद जिले से डा.संतोष, निजाम काॅलेज से डा. बिरजू श्याम, विवेकानंद सरकारी महाविद्यालय से डा. मुक्ता वाणी, तुलसी भवन से जी उमा आदि ने इस वेबिनार में भाग लेकर अपने विचार व्यक्त किए। डॉ. संगीता ने अपने उद्बोधन में कहा कि व्यक्ति के व्यक्तित्व का सम्पूर्ण विकास भाषा से ही संभव है। सोचिए, अगर भाषा नहीं होती तो हम आपस में सम्पर्क कैसे स्थापित करते। हिन्दी ही वह भाषा है जो ज्यादा से ज्यादा लोग बोलते और समझते हैं। लेकिन आजकल युवा पीढ़ी हिन्दी बोलती तो है लेकिन उसे लिखती रोमन लिपि में है। हमें इस ओर भी ध्यान देना होगा। सरिता सुराणा ने अपने वक्तव्य में कहा कि हमारे देश में अंग्रेजी बोलने वालों की संख्या नहीं के बराबर है लेकिन हिन्दी अधिकांश लोगों द्वारा बोली जाती है। इंटरनेट और संचार माध्यमों में अब अंग्रेजी का बोलबाला नहीं रहा। अब सोशल मीडिया और इंटरनेट पर हिन्दी एवं अन्य क्षेत्रीय भाषाओं का वर्चस्व बढ़ता जा रहा है। हम अपनी भाषा को अपनाकर ही हर क्षेत्र में उन्नति कर सकते हैं। तभी तो खड़ी बोली हिन्दी के जनक और आधुनिक हिन्दी साहित्य के पितामह श्री भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जी ने कहा है- 
'निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।
बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटत न हिय को शूल।'
 प्रो. प्रदीप कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि भारत एक विशाल देश है, जहां प्रत्येक दस कोस पर भाषा बदल जाती है। सदियों से संस्कृत हमारे देश की मूल भाषा रही है, हिन्दी का उद्भव संस्कृत से ही हुआ है। हिन्दी सरल एवं सहज भाषा है इसलिए इसका प्रचार-प्रसार पूरे विश्व में हो रहा है, इसलिए हिन्दी भाषा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही है। डॉ. सुकन्या मैडम ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. वंदना को और अन्य सभी सहभागियों को हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं दी और कहा कि डॉ. वंदना हिन्दी भाषा के विकास के लिए समर्पित भाव से काम कर रही हैं। उन्होंने उनकी सेवाओं की सराहना की। इस कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों ने भाग लिया, जिनमें बाबा साहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय से प्रदीप कांबले और उस्मानिया विश्वविद्यालय से शोधार्थी एकता ने भाग लिया। बेगमपेट सरकारी महाविद्यालय हिन्दी विभाग की अध्यक्ष डॉ. अफसरुन्निसा ने भी कार्यक्रम के लिए अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. एच के वंदना ने किया और सभी प्रतिभागियों के प्रति अपना आभार प्रकट किया।
 

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