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विश्ववाणी हिंदी संस्थान की ऑनलाइन काव्य गोष्ठी सम्पन्न
May 9, 2020 • admin • समाचार

 विश्ववाणी हिंदी संस्थान अभियान द्वारा आयोजित ग़ज़ल गोष्ठी में ग़ज़लकारों द्वारा अभूतपूर्व उत्साह से सहभागिता कर इसे सफलता के शिखर पर पहुँचाया गया। मैं बहुत आभारी हूँ आज के मुख्या अतिथि श्री हीरालाल यादव मुम्बई और अध्यक्ष श्री रवि शुक्ल बीकानेर का जिन्होंने आयोजन को चार चाँद लगाए। आज के कार्यक्रम की संचालिका मीना  भट्ट जी ने बहुत संयम और कुशलता के साथ सभी ग़ज़लकारों को बिना किसी लाग लपेट के प्रस्तुत किया। विविध राज्यों और विविध बोलियों की ग़ज़लों ने वास्तव में इस आयोजन को  शिखर पर पहुंचा दिया। 

मिली जिंदगी चलो साथ लेकर लगन - संतोष शुक्ला ग्वालियर, कहाँ तक किसी से शिकवा करोगे - डॉ. मुकुल तिवारी, रातें तो अँधेरी लगती हैं - डॉ. आलोक रंजन राँची, आज फिर ये दिल चुराना चाहता हूँ - अनिल मिश्र उमरिया, कहाँ तक किसी की बुराई करेंगे - डी.पी.लहरे, दोस्ती या कि दुश्मनी निकले - राजकुमार महोबिया, तोल मोल कर बोल जमूरे - सुरेश तन्मय, कहाँ तक किसी की बुराई करेंगे - डी.पी.लहरे, सुनहरे पल की यादों को भुलाया जा नहीं सकता - विनीता पैगवार, तेरी ही बातें तेरा ही नगमा लिखा करेंगे ये तय हुआ था - मेघना राठी भोपाल, का बताऔं आन परी से लोखन के झमेला रजनी शर्मस , श्याम दर्शन मुझे तुम दिखाओ जरा - पुनीता भारद्वाज, कांत बिहारी मधुर नैन कभी नम नांय होंवें - नरेंद्र कुमार शर्मा गोपाल, वो जिंदगी में आए तो गुलाब खिल गये - छाया सक्सेना, दिल को हमारे प्यार जताने का शुक्रिया - इंद्रबहादुर श्रीवास्तव, नजर की झलकियों को प्यार में टोना नहीं कहते - अखिलेश खरे, बबिता चौबे दमोह - बेवफा आज फिर याद आने लगे  को श्रोताओं ने खूब आशीर्वाद प्रदान किया।  

लखनऊ की शान राजेंद्र वर्मा - अंक में आकाश भरने के लिए, जबलपुर की गौरव डॉ. अनामिका तिवारी 'भैरवी' - किसका है इंतज़ार शाम होने लगी, सूर्यनगरी जोधपुर से मधुर शायर अनिल अनवर - प्यास बुझ जाए मैं वह पल तलाश करता हूँ, शायरे वक्त यूनुस अदीब - कदम कदम पे खुदा नेकियाँ बढ़ाता है, अंतर्राष्ट्रीय शायर अरविंद श्रीवास्तव दतिया - बीते पल फिर मुझे याद आने लगे, हर दिल अज़ीज़ शायरा आभा सक्सेना - हालात से ही अपने मुकरता रहा ये दिल, मिथिलेश बड़गैंया - आज मैं अपने हृदय की वेदनाएँ क्या लिखूँ, विनीता श्रीवास्तव - नहीं कोई बला है और मैं हूँ, जय प्रकाश श्रीवास्तव - छाँव  भीतर झाँकती सी धूप, बसंत शर्मा - दूध को जो दूध और पानी को पानी लिख रहे हैं, मीना  भट्ट - मेरे महबूब का दुनिया में बदल क्या होगा, संजीव 'सलिल' - ताजा ताजा दिल के घाव, हीरालाल यादव  - होता है दिल खिलाफ तो सहमत कभी कभी, रवि शुकला -  तेरे ख़याल से तन्हाई तल तो सकती है  - ने आपने कलम से इस आयोजन में चार चाँद लगा दिए। 

मैं तहे-दिल से शुक्रगुजार हूँ उन सबका जो हर शायर को अपने आशीर्वाद से नहलाते रहे। अत्यल्प सूचना पर शायरों ने अपने कलम से हमें नवाज़ा।  यह हमारी खुशकिस्मती है। बतौर ख़ास शुक्रिया रवि शुक्ल जी और हीरालाल जी के प्रति। उक्त बात विश्ववाणी हिंदी संस्थान के संस्थापक श्री संजीव वर्मा सलिल ने कही।

 

 

 

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