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विश्ववाणी हिंदी संस्थान का कोरोना तालाबंदी अवधि में साहित्य सारस्वत अनुष्ठान
June 10, 2020 • पुनिता भारद्वाज • समाचार

जबलपुर। सनातन सलिला नर्मदा तट पर स्थित संस्कारधानी जबलपुर की प्रसिद्ध साहित्यिक सांस्कृतिक सामाजिक संस्था अखिल विश्ववाणी हिंदी संस्थान अभियान के तत्वावधान में महामारी कोरोना के कारण प्रभावशील तालाबंदी के समय का सदुपयोग करने के लिए एक मासिक सारस्वत अनुष्ठान का आयोजन किया गया। इस अभूतपूर्व राष्ट्रीय साहित्यिक आयोजन में प्रतिदिन किसी नई विधा को लेकर श्रेष्ठ-जेष्ठ साहित्यकारों ने नवोदितों का मार्गदर्शन किया। इस अभिनव संकल्पना को क्रियान्वित करने के लिए संस्था के संस्थापक- संयोजक आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' ने विभिन्न प्रदेशों के रचनाकारों को एक मंच पर एकत्र किया। इस अनुष्ठान के अंतर्गत हिंदी पिंगल के वाचिक छंदों, मात्रिक छंदों, वर्णिक छंदों,  भारत में प्रचलित हिंदी छंदों तथा विदेशी भाषाओं के भारत में प्रचलित छंदों को लेकर सारस्वत अनुष्ठान हुए। गीत पर्व, हिंदी ग़ज़ल पर्व, लघुकथा पर्व, लोककथा पर्व आदि के आयोजन में रचनाकारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विभिन्न परिचर्चाओं के माध्यम से कोरोना : अभिशाप में वरदान, तालाबंदी क्यों और कब तक?  कोरोना : पश्चातवर्ती प्रभाव आदि विषयों पर वक्ताओं ने भारत शासन द्वारा क्रियान्वित नीतियों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए परिस्थिति से एक होकर जूझने का आव्हान किया।
कला पर्व के अंतर्गत विविध कलाओं चित्रकला, नृत्यकला गायनकला,  वादनकला, पाककला, उद्यानिकीकला,  योगकला आदि विभिन्न आयामों पर वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। 
बाल पर्व के अंतर्गत विकासशील बाल प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया गया और उनका मार्गदर्शन किया गया। लोक पर्व के अंतर्गत आयोजनों में लोक कथाओं, लोक पर्व, लोक परंपराओं, लोकगीतों, लोक कथाओं लोक पर्वों, लोक में प्रचलित मुहावरों-कहावतें आदि पर चर्चा कर उनके उद्गम को जानने का प्रयास किया गया।
पुस्तक पर्व के अंतर्गत सहयोगियों ने पढ़ी गई पुस्तकों की चर्चा की। उनके रचनाकारों के संबंध में उनकी रचना प्रक्रिया के संदर्भ में पुस्तकों के कथ्य की प्रासंगिकता,  सामयिकता, गुणवत्ता आदि की चर्चा की गई।
रस पर्व के अंतर्गत श्रंगार रस, वीर रस, करुण रस आदि पर प्रथक प्रथक आयोजनों में श्रेष्ठ रचनाओं का वाचन कर इन रचनाओं के तत्वों पर सारगर्भित जानकारी का आदान-प्रदान किया गया। 
भारतीय कथा पर्व के अंतर्गत शिशु कथा बाल कथा बोध कथा दृष्टांत कथा नित्य कथा पर्व कथा रितु कथा सामाजिक कथा आदि विभिन्न आयामों पर व्यापक चर्चा की गई।
भारतीय कथा पर्व पर विषय प्रवर्तन करते हुए आचार्य सलिल ने महाभारत के अभिमन्यु प्रसंग की चर्चा करते हुए भारतीय कथा का उद्गम जन्म पूर्व से बताया तथा जीवन के हर चरण में कथाओं के अवदान की चर्चा की। 
इन  आयोजनों में कालिदास पीठ उज्जैन के पूर्व अध्यक्ष आचार्य कृष्णकांत चतुर्वेदी, मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग के पूर्व संचालक ख्यात भाषाविद डॉ. सुरेश कुमार वर्मा, पूर्व प्राचार्य डॉक्टर चंद्रा चतुर्वेदी, राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त साहित्यकार आचार्य भगवत दुबे, संस्कृत-हिंदी वांग्मय की प्रतिष्ठित हस्ताक्षर द्वय डॉ इला घोष व डॉ सुमनलता श्रीवास्तव, ख्यात पत्रकार साहित्यकार डॉ. सुमित्र व मोहन शशि, अनेक उपन्यासों की रचनाकार राजभाषा परामर्शदात्री समिति की सदस्य डॉ. राजलक्ष्मी शिवहरे,  पलामू झारखंड के वरिष्ठ साहित्यकार श्रीधर प्रसाद द्विवेदी, पीतांबरा पीठ दतिया के निवासी अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार डॉ अरविन्द श्रीवास्तव 'असीम',  कासगंज उत्तर प्रदेश के अखिलेश सक्सेना, पुणे पुणे निवासी प्रतिष्ठित नवगीतकार शशि पुरवार, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से पधारी रजनी शर्मा 'बस्तरिया',  दमयंती की नगरी दमोह की बबीता चौबे 'शक्ति' तथा मनोरमा रतले ,अंग्रेजी ग़ज़ल के एकमात्र रचनाकार डॉ अनिल कुमार जैन, लखनऊ से  छंदशास्त्री एवं गजलकार राजेंद्र वर्मा, कहानीकार अमरनाथ, प्राचार्य तथा साहित्य सेवी डॉ मुकुल तिवारी, ग्वालियर निवासी डॉ संतोष शुक्ला, प्रसिद्ध वनस्पतिविद डॉ अनामिका तिवारी, सिरोही राजस्थान के वरिष्ठ साहित्यकार छगनलाल गर्ग, नवोदित लघुकथाकार अरुण भटनागर, प्रसिद्ध शिक्षा शास्त्री आशा रिछारिया लघुकथा के क्षेत्र में राष्ट्रीय फलक पर ध्रुव तारे की तरह स्थिरु कांता राय भोपाल, प्रसिद्ध शायर सलीम अंसारी, जोधपुर राजस्थान निवासी शायर-संपादक अनिल अनवर व शास्त्रीय गायिका मृदुला सिन्हा, बाल साहित्यकार छाया त्रिवेदी, रंगमंच की प्रतिष्ठित हस्ताक्षर टीकमगढ़ से पधारी वेदिका गीतिका, देहरादून की दोहाकार आभा सक्सेना, आगरा से बृज रचनाकार, नरेंद्र शर्मा, 
हिंदी ग़ज़लकार मिथिलेश बड़गैया, यूनुस अदीब, सलीम अंसारी, समीक्षक द्वय डॉ स्मृति शुक्ल व नीना उपाध्याय, दिल्ली से डॉ भावना शुक्ला, बीकानेर से शायर रवि शुक्ला, मुंबई से हीरालाल यादव, नवगीतकार जयप्रकाश श्रीवास्तव, बुंदेली साहित्यकार लक्ष्मी शर्मा, सागवाड़ा से विनोद वाग्वर, गुड़गाँव से ग्रुपकैप्टेन श्यामल सिन्हा, दूरदर्शन पत्रकार कामना श्रीवास्तव, प्रो श्वेतांक किशोर जपला आदि लगभग 300 साहित्यकारों ने सतत सहभागिता कर इन आयोजनों को अभूतपूर्व सफलता प्रदान की।
साहित्य, संगीत, नृत्य, पर्यावरण, उद्यानिकी, वानिकी,  धर्म, आध्यात्म, दर्शन, समालोचना, संस्मरण, निबंध, वास्तु, यांत्रिकी आदि विविध विषयों के श्रेष्ठ-ज्येष्ठ रचनाकारों का मार्गदर्शन पाकर नवोदितों ने शंका-समाधान भी किया। प्रसिद्ध छंदशास्त्री नवगीतकार समालोचक आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' ने पुनीता भारद्वाज, उदयभानु तिवारी, , सारांश गौतम ,रेखा सिंह, सुषमा शैली, डॉ. आलोक रंजन, बसंत शर्मा , छाया सक्सेना, मनोरमा पाखी , मीना भट्ट , मंजरी शुक्ला , रमन श्रीवास्तव , अरुण अर्णव खरे आदि के साथ इस सारस्वत अनुष्ठान को सहभागियों की माँग पर 50 श्रंखलाओं तक बढ़ाने की घोषणा की।
 

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