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विरासत के फूल(काव्य संग्रह)
June 23, 2020 • कारुलाल जमडा़ • समीक्षा/पुस्तक चर्चा
 
संस्कृत के ख्यात वेदग्य,साहित्यवेत्ता-शिक्षाविद् और काव्यमनीषी आदरणीय डा.मुरलीधर चाँदनीवाला जी की हिन्दी कविताओं का प्रथम पुष्पगुच्छ आपके हाथों में है| कुछ काव्य सरितायें ऐसी होती है,जिन्हें भूमिका में बांधा नहीं जा सकता|जब इनमें अवगाहन किया जाता है तो पाठक का मन स्वयं पवित्र होकर निकल आता हैं| इस संग्रह की प्रत्येक कविता जैसे हमारी पुण्य सरिताओं गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा की पवित्र धाराओं की तरह है और इनका पठन किसी संगम पर तीर्थाटन जैसा| 
मेरी लेखनी में वह सामर्थ्य नहीं कि वह वेदमंत्रों के सुमधुर शास्त्रीय गायक डा.मुरलीधर चाँदनीवाला की कविताओं /गीतों  की गहराई की थाह पा सके|मुझे अवसर मिला है कि मैं कुछ शब्दों की भावांजलि से इस काव्यरुपी ज्योतिर्लिंग का अभिषेक कर सकूं| मुझ जैसे साहित्य के शिशु और अकिंचन रचनाकार के प्रोत्साहन में अभिवृद्धि का यह एक अभिनव प्रयास ही है जो साहित्य की उर्वराशक्ति से समृद्ध और महाप्राण 'निराला' जैसी तासीर वाले सहज,सरल और समर्थ कवि  मुरलीधर चांदनीवाला जी ने मुझे यह अवसर दिया है|
डा.मुरलीधर चाँदनीवाला की रचनाओं के विषय सर्वथा नूतन और नवीन बिम्बों से अलंकृत होने के साथ ही मर्मस्पर्शी भी होते हैं|"विरासत के फूल"नाम से आया यह संग्रह कवि के पुज्यनीय पिता को समर्पित है और 'पिता' को संबोधित कविता इतनी हृदयस्पर्शी है कि आँखें भर जाती है और शीश झुक जाता है। आपकी कवितायें भक्ति का सुन्दर जीवन दर्शन है । कुछ कवितायें निःशब्द होकर आत्मसात कर लेने में ज्यादा सुख देती हैं। कई रचनाएँ 'प्रशंसा' शब्द से परे हैं। वर्णित शब्द एवं भाव पाठकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।कविताओं में पीड़ित जन की 'पीड़ा' का आर्तनाद है तो दिशाबोध के साथ चेतावनी भी।'बेटियाँ कुछ लेने नहीं आती पीहर' कविता तो कई भाषाओं में अनूदित हो चुकी है|आपकी ताजा कविताओं में अभिव्यक्त गहरा अन्तर्द्वंद्व पाठक को भी मथता है।आँखें बंद कर सूर्य की उपस्थिति को नकारने वालों को सूर्य की तपीश देर-सवेर अनुभव करा ही देती है कि 'सूर्य' है|समय आपके विलक्षण काम की तपन से साहित्य जगत को जल्द ही आपके  महत्वपूर्ण अवदान की अनुभूति कराएगा,यह तय है|काव्य संग्रह की अप्रतिम शैली आपके रचना-संसार को,उसके समाचरण को कमनीय ही नहीं नमनीय भी बना देती है| 
कई कविताओं में तो आप वाक् शून्य कर देते हैं |दो पंक्तियाँ पढ़ते ही हम इस प्रकार खिंचे चले जाते हैं जैसे किसी मंत्रमुग्ध कर देने वाले मुरली वादक के साथ खो गये हों|कभी हॄदय भर जाता है तो कभी अश्रुधारा के रूप में छलक जाता है |आपकी कविताओं में निराला का निर्माल्य, पंत की प्रकृति, प्रसाद का प्रबोधन और महादेवी का प्रज्ज्वलन है|छायावादी कविता का सौंदर्य आपकी कविताओं पर अपनी प्रतिच्छाया कर रहा है|विद्वान मर्मग्य श्री राजशेखर व्यास जी की भूमिका ने 'सोने पर सुहागा'जैसा कार्य किया है|
हर पाठक जो डा.मुरलीधर चाँदनीवाला जी से किसी न किसी रुप में जुडा़ है,उसके लिए तो यह कालजयी संग्रह है ही,सोशल मीडिया के माध्यम से कवि से जुडे़ पाठकों के लिए भी यह संग्रह पठनीय और संग्रहणीय है|"विरासत के फूल" जहाँ कवि का जीवन दर्शन है ,वहीं आने वाली पीढी़ का मार्गदर्शक प्रकाश स्तंभ भी|आदरणीय चाँदनीवाला जी को अशेष शुभकामनाएँ और अनंत प्रणाम!
पुस्तक- विरासत के फूल
कवि- डा. मुरलीधर चाँदनीवाला
प्रकाशक- बोधि प्रकाशन,जयपुर
मूल्य- 200/-
*समीक्षक-कारुलाल जमडा़
 

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