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वक़्त की तरकश से कोई तीर न चलने पाए
September 23, 2020 • ✍️सोनल पंजवानी • गीत/गजल
✍️सोनल पंजवानी
वक़्त की तरकश से कोई तीर न चलने पाए
मेरी खुशियों का समा ऐसे न ढलने पाए
 
वक़्त की शाख़ से अब लम्हे न लुटने पाए
मेरे हाथों से तेरा दामन न अब छुटने पाए
 
कितनी उम्मीद से माँगी है ये रौशनी की मुराद
इन आँधियों से चरागात न बुझने पाए
 
वक़्त ने डाल दिया पल पल का हिसाब इस चेहरे पर
मेरी आँखों से वो मंज़रे जज़्बात न खोने पाए
 
किसी से दिल क्या लगा बैठे ये दस्तूर हो गया
दिल किसी सूरत में अब आबाद न होने पाए
 
अपनी आँखों के चराग़ों को जो रौशन कर दे
वो तरन्नुम वो नज़ारे न कहीं खोने पाए।
 
*निपानिया, इंदौर
 

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