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वक्त
April 23, 2020 • डॉ रश्मि शर्मा • कविता

*डॉ रश्मि शर्मा

था, वक्त ने मिलाया,
है, वक्त ने ही बिखेरा|
था, वक्त ने हंसाया,
है, वक्त ने रुलाया|
थे, वक्त के तिनके
वक्त का ही ताना-बाना|
है, वक्त ने बनाया,
बागवान को  बियावान|
था वक्त जो साथी,
है वक्त ही साकी|
था वक्त ने संभाला,
है वक्त ने ही पिलाया|
है वक्त का करिश्मा
और वक्त का ही नूर,
की वक्त के आगे
सबने है सर झुकाया|
है वक्त के पहिए मैं प्रगति हमारी,
है इसकी तीलियों ने हमको संवारा|
है वक्त के सपने और वक्त से ही अपने |        
है वक्त की लहरों ने हर शख्स को तराशा|

*डॉ रश्मि शर्मा,उज्जैन

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