ALL कविता लेख गीत/गजल समाचार कहानी/लघुकथा समीक्षा/पुस्तक चर्चा दोहा/छंद/हायकु व्यंग्य विडियो
उलझनों के झूले
August 28, 2020 • ✍️प्रीति शर्मा असीम • कविता
✍️प्रीति शर्मा असीम
उलझनों के बीच भी मुस्कुराती हैं। 
अपने दर्द को दो घड़ी भूल जाती है।
जिंदगी  हर त्यौहार को ,
हर हाल में उदास होकर भी, 
खुशियों के झूले पर झूल जाती है।
उलझनों के बीच भी मुस्कुराती हैं।
अपने दर्द को दो घड़ी भूल जाती है ।
जिंदगी हर दिन ,
नयी लड़ाई के लिए तैयार हो जाती है ।
रोते हुए भी मुस्कुरा कर,
सब ठीक है.......!!!!
यह बात कह जाती है ।
उलझनों के बीच भी मुस्कुराती हैं। 
अपने दर्द को दो घड़ी भूल जाती है ।
जिंदगी में झूले ही ,
नहीं मिलते हर पल ।
रस्सियों पर झूलती ।
जिंदगी भी ,
अपनी बात कह जाती है।
खुशियां कीमतों से ही नहीं खरीदी जाती ।
मुस्कुराने के लिए हर दर्द से उभरकर ,
जिंदगी हर बात कर जाती है।
 
*नालागढ़ हिमाचल प्रदेश
 

अपने विचार/रचना आप भी हमें मेल कर सकते है- shabdpravah.ujjain@gmail.com पर।

साहित्य, कला, संस्कृति और समाज से जुड़ी लेख/रचनाएँ/समाचार अब नये वेब पोर्टल  शाश्वत सृजन पर देखेhttp://shashwatsrijan.com

यूटूयुब चैनल देखें और सब्सक्राइब करे- https://www.youtube.com/channel/UCpRyX9VM7WEY39QytlBjZiw