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तिरंगे तुझकों मेरा प्रणाम
January 25, 2020 • पुखराज जैन पथिक • कविता

*पुखराज जैन 'पथिक'
जन जन मन में गूंज रहा तेरा गौरव गान,
तिरंगे तुझकों मेरा प्रणाम ।
आजादी का शंख बजा जब तूने नाम ये पाया ,
अंग्रेजों के सीने पर शान से तू लहराया ,
भारत माता के हाथों से मिला तुझें वरदान।
झंडा वंदन होकर जब शान से तू लहराता,
तूझे देखने बच्चा बच्चा तेरे सामने आता,
तूझकों शिष झूकाकर बढ़ जाती हमारी शान ।
 
जिसकों मिलता साया तेरा नामअमर हो जाता ,
उसकों अपनें जीवन का सारा सुख मिल जाता ,
सारे विश्व में तेरे नाम की एक अलग पहचान ।
तेरे खातिर कई वीरों ने दे दी अपनी बलिदानी ,
हंसते हंसते शीष कटाएं दे दी अपनी कुर्बानी ।
तेरा शीष न झूकनें देंगे तू है हमारी आन ।
 
तिरंगे तूझकों मेरा प्रणाम ।
 
*पुखराज जैन पथिक, नागदा
 
 
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