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टेंशन को ही टेंशन दे दो,झगड़ा होगा ही नहीं…!
May 15, 2020 • सुशील कुमार 'नवीन' • व्यंग्य

*सुशील कुमार 'नवीन'

लोकडाउन 3.0 ने अपना समय नजदीक आता देख बोरिया बिस्तर बांधना शुरू कर दिया है। लोकडाउन 4.0 सबके घरों के बाहर इस इंतजार में बैठा है कि 3.0 बाहर निकले और वो चार्ज संभाले। मोदी जी ने उसे ज्वाइनिंग लैटर तो दो दिन पहले दे दिया है पर सीट तो खाली चाहिए ना। ऐसे में जैसे ही 3.0बाहर निकलेगा 4.0 झट से सीट कब्जा लेगा।अब 4.0 का क्या स्वरूप रहेगा, कैसा व्यवहार होगा, पहले वालों से सख्त होगा या और आरामदायक साबित होगा। किसी को पता नहीं है। इस बारे में चिंता करने वाले ज्यादा हैं। कुछ ऐसे भी लोग है हैं जिनके लिए चाहे लोकडाउन 20.0 आ जाए उनकी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। ऐसे ही हमारे एक मित्र है रमेश बाबू। प्राथमिक स्तर के अध्यापक है। कोरोना काल में उनकी वयस्तता पहले जैसी तो नहीं रही फिर भी अपने को व्यस्त रखने में उन्होंने कोई कोर कसर नहीं छोड़ रखी है।

सोमवार सुबह बाजार में मिल गए।सोशल डिस्टेंसिंग के चलते दूर से ही राम-राम की। मैंने पूछा-और रमेश बाबू ! कैसी गुजर रही है। बोले-जी मौज हो रही है। सुबह आराम से उठते हैं। कोई भागा दौड़ी तो अब है नहीं। दिनभर खाना-पीना और फिर सो जाना। कुम्भकर्ण जैसा जीवन जी रहे हैं। मजा सा आया हुआ है।

मैंने कहा-बड़े नसीब वाले हो। लोकडाउन में तो घरों में तनाव बढ़ा है। रोजाना मनोवैज्ञानिक तनाव से दूर रहने के टिप्स दे रहे हैं और आप कह रहे हो कि मजे आये हुए है। वो कैसे,हमें भी तो बताओ।

बोले-देखो आप खुद काम करते हैं और मैं करता ही नहीं। मैं तो सबको कराता हूं। और इतना कराता हूं कि घरवालों को कुछ और करने का मौका ही नहीं मिल पाता है। झगड़ा तो तब होगा ना जब वो खाली होंगे। बोले-देखो! जिंदगी तो जीनी है चाहे हंस के जीओ, चाहे रो के जीओ। इसलिये टेंशन को ही टेंशन दे दो। मैंने कहा तो कुछ हमें भी बताओ। हमारे यहां तो सब्जी क्या बने। इसी पर महाभारत शुरू हो जाती है।

बोले-जो काम पहले के पैडिंग है वो करवाओ। घर के सारे टांडों को अच्छी तरह से साफ करवाओ। खुद ऊपर मत चढ़ना। घरवाली को चढ़ा देना।और कहना कि रोज रोज ऊपर नहीं चढ़ा जाता ऐसे में अच्छी तरह से साफ करना। साथ में एक काम करना। नीचे से वो बड़े वाला स्टूल उठाकर दूसरे कमरे में रख देना ताकि वो जल्दी से नीचे ना उतर पाए। बीच मे आवाज भी लगाए तो कह देना कि अभी वहीं रुको। ऐसे में आधा दिन एक टांड की सफाई में निकल जायेगा। अगले दिन दूसरा टांड ले लेना। ऐसे में एक हफ्ता तो यूं ही निकल जायेगा। थकान के मारे घरवाली को झगड़ा तो दूर बोलने का ही वक्त नहीं मिलेगा।

मैंने कहा-इससे तो इतने दिन निकलने से रहे। कितने दिन सफाई का बहाना चलेगा। बोले-जब तक कोरोना है सफाई जरूरी है ना। किसी दिन घर की सभी चद्दर-बेडशीट, तकियों के कवर धुलवा दो। वाशिंग मशीन में धोए तो कह देना कि प्रधानसेवक ने स्वदेशी अपनाने की कही है। ये मशीन विदेशी है। इसका प्रयोग अब हम नहीं करेंगे। तुम्हारी बात मानें या ना मानें प्रधानसेवक की बात जरूर मानी जायेगी। मैने कहा-ठीक है ये भी हो जाएगा। और बताओ क्या-क्या किया जाए? बोले-घर की रसोई में वो चीजें बनवाओ जो टाइम पूरा लगवाएं। जैसे बेसन की बडी बनवाओ, घर के ही पापड़ बनवाओ।सेई बनवाओ। बाजार में कैरी आई हुई है। एक 50 किलो का कट्टा लेकर रख दो। काटने-सुखाने में ही 10-12 दिन निकल जाएंगे। अचार के लिए बर्तन साफ करना। मसाले पीसना। फिर अचार डालना। सबमें पूरा समय लगेगा। हां, एक काम करना। बीच-बीच में यूं जरूर कहते रहना कि खुशबू बता रही है इस बार अचार बहुत बढ़िया बनेगा। मैंने कहा-इतने अचार का करेंगे क्या।बोले-रिश्तेदारों के पास भेज देना।सम्बन्धों में मजबूती आएगी। कुछ मेरी तरफ भी दे देना गुरु दक्षिणा मानकर। सारी बातें आज ही जानोगे क्या। पहले इन नुस्खों को आजमाओ। आगे की आगे सोचेंगे।यह कहकर उन्होंने घर की राह ली। मैं भी घर की तरफ़ चलते सोचने लगा कि बात तो सही है। टेंशन को ही काम की टेंशन दे देते हैं। देखते हैं क्या रिजल्ट मिलेगा। 

*सुशील कुमार 'नवीन' ,हिसार

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