ALL लॉकडाउन से सीख कविता लेख गीत/गजल समाचार कहानी/लघुकथा समीक्षा/पुस्तक चर्चा दोहा/छंद/हायकु व्यंग्य विडियो
तंग,शहर की लड़की
November 12, 2019 • शिवानन्द सिंह 'सहयोगी' • गीत/गजल

*शिवानन्द सिंह 'सहयोगी'*

 

सरकारी नल पर धोती है,

तन के मैले कपड़े,

तंग, शहर की लड़की.

 

पढ़ने के दिन खाली बैठी,

टूटा बिजली खंभा,,

मिले दुखों को मार रही है,

वह साहस का रंभा,

व्यंग्य चुटीले डंक मारते,

अन्तस् फैले लफड़े,

पंग, शहर की लड़की.

 

रोटी का है गरम तवा भी,

जब तब होता ठंडा,

जब देखो तब सींझ न पाता,

मोटा चावल खंडा,

निपट गरीबी भाग लिखी है,

खाली थैले पकड़े,

भंग, शहर की लड़की.

 

उभरे कई सवालों के सँग,

घेरे में है जीती,

यह अच्छा है, संकल्पक है,

जहर नहीं है पीती,

आये हर संकट से जूझी,

रह रह झेले तगड़े,

जंग, शहर की लड़की.

 

*शिवानन्द सिंह 'सहयोगी'

'शिवाभा' ए-२३३ गंगानगर 

मेरठ-२५०००१ उ.प्र.

दूरभाष ९४१२२१२२५५ 

 

शब्द प्रवाह में प्रकाशित आलेख/रचना/समाचार पर आपकी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया का स्वागत है-

अपने विचार भेजने के लिए मेल करे- shabdpravah.ujjain@gmail.com

या whatsapp करे 09406649733