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तन बर्फ हुए
January 10, 2020 • अशोक 'आनन' • गीत/गजल

*अशोक 'आनन'

सर्द हवाएं -
सही न जाएं ।
 
दूर - दूर तक -
पसरा    कोहरा ।
सूरज लगता -
सिहरा - सिहरा ।
 
पीर दूब की -
कही न जाए ।
 
नंगा तन ये -
बूंदा - बांदी ।
ठंडे   चूल्हे -
रीती  हांडी ।
 
दिन भर ठिठुरन -
मुई न जाए ।
 
बंद हुए सब -
द्वार   घरों    के ।
तन बर्फ हुए -
मन पत्थरों के ।
 
बूंद प्यार की -
चुई न जाए ।
 
*अशोक 'आनन', मक्सी, जिला-शाजापुर
 
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