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तब ही तो
May 8, 2020 • प्रो.शरद नारायण खरे • कविता

*प्रो.शरद नारायण खरे
अब तो जागो,सभी छोड़ो सोना,
 तब ही तो मर सकेगा करोना ।
 
ज़िन्दगी तो  बहुत क़ीमती है,
जो गई तो नहीं फिर मिलेगी
अगर दिल की बगिया मिटी तो,
नहीं फिर कली खिल सकेगी
 
क्षय की गागर को तुम अब भरो ना,
तब ही तो मर सकेगा करोना ।

हम में हिम्मत रहे,हम में ताक़त रहे,
कोई हमको नहीं फिर हरा पाएगा
हम रखें धैर्य नित,शांत हो घर रहें,
कोई हमको नहीं फिर डरा पाएगा

अपनी खुशियों को ख़ुद तुम हरो ना,
तब ही तो मर सकेगा करोना ।

आज की ये घड़ी,दुख की लड़ियां झड़ीं,
पर निराशा हमें ना ही छू पाएगी
हम रखें तेज सँग,ईशकृपा के रँग,
तो ये जीवन की बगिया महक जाएगी

घर से बाहर कदम तुम धरो ना,
तब ही तो मर सकेगा करोना ।

आई विपदा बड़ी,ज़िम्मेदारी खड़ी,
अक़्लमंदी से सब कुछ संवर जाएगा
वेदना सबमें हो,भावना सबमें हो,
तो नहीं कुछ भी देखो बिखर पाएगा

सूखे पत्ते सा तुम अब झरो ना,
तब ही तो मर सकेगा करोना ।

सूर्य दमकेगा फिर,चांद निकलेगा फिर,
चांदनी गीत फिर से नया गाएगी
आदमी हो प्रबल,जीत लेगा समर,
ज़िंन्दगी इक नई रोशनी लाएगी 

आज खुशियों को मिल सब वरो ना,
तब ही तो मर सकेगा करोना ।

*प्रो.शरद नारायण खरे
मंडला(मप्र)
 

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