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सुखी जीवन
June 6, 2020 • पुष्पा सिंघी • दोहा/छंद/हायकु

*पुष्पा सिंघी

समझे कौन
वसुन्धरा की पीर
पसरा मौन !

वृक्षारोपण
प्रकृति-संतुलन
सुखी जीवन !

मास्क का टास्क
कहाँ होगा पर्याप्त
जीने के लिए !

क्यूँ एक दिन
पर्यावरण-राग
चेत सयाने !

चूँ चूँ करती
ठूँठ पे बैठी चिड़ी
बादल छाए !

कंक्रीट वन
विषैला पानी-हवा
मेज पे दवा !

ढूँढता छाँव
थका लकड़हारा
घायल पाँव !

आँखों में पानी
नदी खुद प्यासी है
युगों-युगों से !

पुष्पित मन
प्रकृति-संरक्षण
लक्ष्य वरण !

संन्यासी सूर्य
पीले वस्त्र पहने
भक्त निहारे !

पुष्पा सिंघी , कटक

 

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