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सिर पर जाड़ा
November 29, 2019 • अशोक आनन • गीत/गजल


*अशोक आनन*
फटी रजाई -
सिर पर जाड़ा ।
मौसम ने -
फिर किया कबाड़ा ।


सूरज ने भी -
फेरीं आंखें ।
उघड़े तन को -
कैसे ढांके ?

थर-थर , थर -थर -

रहे कांपते ।
लेकिन , पीने -
मिला न काड़ा ।


स्वेटर -कंबल -
लगता सपना ।
पेट है सिगड़ी -
जिसमें तपना ।

घुन सरीखी -

चिंता लागी ।
पत्नी ने जब -
आटा झाड़ा ।

*अशोक आनन,मक्सी - 465106 जिला-शाजापुर (म.प्र.)
मोबाइल नं : 9981240575

 
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