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शक्ति हूं मैं नारी शक्ति हूं मैं
December 15, 2019 • डॉ0 निशा चौहान • कविता

*डॉ0 निशा चौहान*
 
नारी हूं मैं ना समझो बेचारी हूं मैं
जगत जननी देवी स्वरूपा हूं मैं
दया, ममता, शील की मूर्ति हूं मैं
पुष्प सी कोमल चंडी सी संहारी हूं मैं
ममता की शीतल छांव भस्माभूत की चिंगारी हूं मैं
नारी हूं मैं शक्ति हूं मैं
तभी तो आज पुरूषों पर भारी हूं मैं
थल से जल हिमालय से नभ में छाई हूं मैं
ज्ञान विज्ञान, शिक्षा- दीक्षा, राजनीति - विधि का पाठ पढ़ाती हूं मैं
परिवार, समाज, राष्ट्र की शोभा पर बलिहारी हूं  मैं
ममता का पाठ पढा जड़ में संवेदना जगाती हूं मैं
सेवा - मान- त्याग सरीखें आदर्श मूल्यों से जग रोशन करती हूं मैं
पर आज इस भ्रष्ट व्यवस्था में
मुझ पर हो रहे अत्याचारों पर चिंता व्यक्त करती हूं मैं ---
तोडूंगी व्यवस्था बंधनों को तो तेरा नाश कंरूगी मैं
या तुझे जगाऊगीं या खुद जाग जांऊगी मैं
तेरे जन्मदायनी तेरा नाश बनूंगी मैं
नारी हूं मैं शक्ति मै
ना समझो बेचारी हूं मैं
शक्ति हूं मैं नारी शक्ति हूं मैं।।
 
*डॉ0 निशा चौहान
रोहडू, जिला शिमला हिमाचल प्रदेश
 
 
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