ALL कविता लेख गीत/गजल समाचार कहानी/लघुकथा समीक्षा/पुस्तक चर्चा दोहा/छंद/हायकु व्यंग्य विडियो
शहर अब शहर न रहा
June 10, 2020 • अशोक 'आनन' • गीत/गजल

*अशोक ' आनन '
 
शहर -
अब शहर न रहा ।
चैन -
रत्ती  भर  न रहा ।
 
भीड़ भरे शहर में -
पसर गया सन्नाटा ।
भूल गया आदमी भी -
सैर और सपाटा ।
 
सुहाना -
सफ़र     न    रहा ।
 
छांव   ने   भी -
समेट  लिया  आंचल ।
सांझ का भी -
धुल   गया   काजल ।
 
सुखद -
अब पहर  न रहा ।
 
धूप ने भी सिर पर -
उठा रखा आसमान ।
हवाओं ने भी -
मचा रखा घमासान ।
 
आदमी -
ख़बर    न     रहा ।
 
सुबह , दोपहर -
शाम सूनी रही ।
पीड़ा जीने की -
कई गुनी रही ।
 
हरा -
अब शज़र न रहा ।
*मक्सी,जिला -शाजापुर ( म.प्र.)
 

अपने विचार/रचना आप भी हमें मेल कर सकते है- shabdpravah.ujjain@gmail.com पर।

साहित्य, कला, संस्कृति और समाज से जुड़ी लेख/रचनाएँ/समाचार अब नये वेब पोर्टल  शाश्वत सृजन पर देखेhttp://shashwatsrijan.com

यूटूयुब चैनल देखें और सब्सक्राइब करे- https://www.youtube.com/channel/UCpRyX9VM7WEY39QytlBjZiw