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शारदे,मेरे शब्दों को प्रवाह दो
November 29, 2019 • डॉ साधना गुप्ता • कविता

*डॉ साधना गुप्ता*

सोयी मानवता को जगाने को,
पश्चिमी विपरीत बयार से
 संस्कृति को बचाने को
मेरे शब्दों को धार दो,
शक्ति दो,करूणा की पुकार दो-
मचा सके जो आतताइयों में हाहाकार
नारी की अस्मिता रक्षार्थ
अग्रजों के सम्मानार्थ
अनुजों के स्नेहार्थ,
मेरे शब्दों को ज्ञान दो-
कर सके जो सत-असत का भान
अपने पराए की पहचान
जीवन लक्ष्य प्रति सावधान,
मेरे शब्दों को दो सँवार-
दे सके जो बच्चों को संस्कार
युवाओं को परिवार
बुजुर्गों को प्यार
शारदे, मेरे शब्दों को प्रवाह दो।
 
*डॉ साधना गुप्ता
मंगलपुरा, टेक, झालवाड़ 326001 राजस्थान
मो,9530350325
 
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