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सेल्फी
August 9, 2020 • ✍️नीतू मुकुल • कहानी/लघुकथा
✍️नीतू मुकुल
आज सुबह से ही घर में काफी चहल-पहल है | सभी अपने काम में व्यस्त हैं | माँ , बाबा , भाई कुछ ज्यादा ही उसका ख्याल रख रहे हैं | पूजा क्या खाओगी , पूजा नहाने गयी कि नही , पूजा ने चाय पी कि नही ?
“ अरे सुनती हो ...! पूजा को नाश्ता दिया की नही , कि अपने काम में ही व्यस्त हो .” पापा ने माँ को लगभग डांटते हुए बोला |
“ अरे बाबा मैं क्या-क्या करूं ? एक जान और हजार काम . पूजा आ बेटा जरा माँ के पास घड़ी दो घड़ी बैठ जा |” 
पूजा आश्चर्य से सब को देख रही थी | उसे समझ में नहीं आ रहा था की माँ को क्या हो गया | ऐसा क्या हो गया कि वो चौबीस घंटे में सबको इतनी अच्छी लगने लगी | ये वही माँ है , जिससे दो दिन पहले इतना ही बोला था कि स्कूल को देर हो रही है , जल्दी से टिफ़िन दे दो | उस समय माँ पापा को खाना खिला रही थीं | गुस्से में चार सूखी रोटी पटकते हुए बोलीं....
“ जा यहाँ से ......! बड़ी आयी स्कूल जाने वाली , और सुन लौट के आकर घर का झाड़ू –पोंछा कर लेना , समझी कि नहीं |” और छोटे भाई को टिफ़िन देकर अपने हांथो से नाश्ता कराने लगी | यह सब देख कर पूजा आँखों में आंसू लेकर चुपचाप चली गयी |
ऐसा नही था कि पूजा के घर के हालात खराब थे | सब कुछ अच्छा था | पिता सरकारी नौकरी में थे | माली हालत अच्छी नहीं तो खराब भी न थी | बस खराब थी तो उसकी किस्मत | माँ का प्यार न मिला | हर समय माँ डांटती रहती और वो सोंचती की आखिर इस छोटी सी उम्र में क्या गलती हो गयी | उसे याद नही कि माँ ने कभी प्यार से खाना खिलाया हो और तैयार किया हो | हां याद है तो बस माँ की डांट | वह अकेले में सोंचती कि वो इसकी सगी माँ है की नही |
इन्ही सवालों के घेरे में उलझे हुए कब उसने दसवीं पास कर ली पता ही नही चला | दसवीं प्रथम श्रेणी में पास की और जिले में अव्वल भी रही | उस समय बेटियों के साथ सेल्फी लेकर सरकार को भेजने का दौर चल पड़ा था | दसवीं में टॉप करने के कारण आज मीडिया वाले भी घर पर आये हुए थे और पूजा का इंटरव्यू ले रहे थे | जब उन्होंने पूजा से पूंछा कि आपकी पढ़ाई में सबसे ज्यादा योगदान किसका था तो माँ बोली ..
“ अरे ..! माँ के अलावा बेटी को कौन समझ सकता है |”
और वो गुमसुम माँ को देख रही थी |
माँ-पापा दोनों अच्छे से तैय्यार होकर आये और माँ बोली
“ इधर आ .. सेल्फी भेजना है की नही |”
*जयपुर
 

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