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सपेरे दिन
June 12, 2020 • अशोक 'आनन'  • गीत/गजल

*अशोक 'आनन'
आतंक के 
सांपों को ले  -
घूम रहे सपेरे दिन ।
 
              चेहरे 
              गिरगिट की तरह  -
              बदल  रहे  रंग ।
              किसी 
              अशुभ की चिंता में -
              फड़क रहे अंग ।
 
नेह की मछलियां 
रेत  पर -
भुंज रहे मछेरे दिन ।
 
              पेट हैं खाली
              पर शस्त्रों से -
              भरे हैं खज़ाने ।
              सूरज , 
              कल कौन न देखेगा -
              राम जाने ।
 
दीये तक
झोपड़ियों से -
छीन रहे अंधेरे दिन ।
*मक्सी,जिला - शाजापुर ( म .प्र .)
 

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