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सम्राट थे छत्रपति शिवाजी महाराज
November 24, 2019 • विवेक मित्तल • समाचार


दिल्ली - छत्रपति शिवाजी महाराजजी के द्वारा किया गया शासन का विस्तार, प्रजा के लिए किया कार्य, युद्धकौशल्य, इतिहास में स्थान तथा उनके कार्य की आज भी समाज पर अमिट छाप देखें, तो कहना गलत नहीं होगा कि, वे केवल एक छत्रपति अर्थात् 'राजा' नहीं थे। उनका परिचय 'सम्राट' के रूप मे होना चाहिए। ऐसा आवाहन इंडिया टुडे, दिल्ली, के उप-संपादक श्री. उदय माहुरकरजी ने अपने सम्बोधन में किया। उत्तर भारत हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन के द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र में सम्बोधन करते हुए उन्होंने बताया कि, छत्रपति शिवाजी महाराज ने स्वराज्य की स्थापना की शपथ ली, वहां से उनके स्वर्गवास के समय उनके राज्य की लम्बाई 1500 किलोमीटर तक बढ़ गयी, इतना राज्यविस्तार उनके द्वारा किया गया। छत्रपति शिवाजी महाराज के स्वराज्य को समाप्त करने दिल्ली से निकला औरंगजेब बादशाह 23 वर्ष तक महाराष्ट्र में जूझता रहा, इतना ही नहीं वहीं पर दफ़न हो गया।
युवाओं को याद रखना चाहिए शौर्य का गौरवशाली इतिहास - मेजर जनरल जी.डी. बक्षी
मेजर जनरल जी.डी. बक्षीजी ने भारत के सुरक्षा के संदर्भ में अपने विचार रखते हुए कहा कि कश्मीर मंे भारतीय सेना पर पत्थर फेंकनेवाले पत्थरबाजों को वहां की सरकार द्वारा सहायता उपलब्ध करवाई जाती थी। वर्तमान सरकार द्वारा वहां पर पर्याप्त सेना भेजने के कारण सब पत्थरबाज गायब हो गये। हिंदुओं को आगामी काल मे सुरक्षित रहना है, तो 'अहिंसा परमो धर्मः' की मानसिकता बदलकर अन्याय के विरोध मंे लडने की मानसिकता निर्माण करनी होगी। हमें अपने गौरवशाली तथा शौर्य के इतिहास का स्मरण करना होगा।  
हिंदू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता रमेश शिंदेजी ने हिंदू राष्ट्र की संकल्पना के संदर्भ मे कहा कि, अयोध्या में प्रभु श्रीरामजी का मंदिर बनना केवल अस्मिता का प्रतीक नहीं, अपितु हमारी राष्ट्रभावना का भी प्रतीक है। हम जब हिंदू राष्ट्र का विचार रखते हैं, तो हमंे देश तोडनेवालों की दृष्टि से देखा जाता है; परंतु वास्तविकता में जेएनयू तथा अलीगढ मुिस्लम विश्वविद्यालय में 'भारत तेरे टुकड़े होंगे' इस प्रकार के तथा भारतविरोधी नारे लग रहे है। हिन्दू धर्म एकमात्र विश्वकल्याण और विश्वबंधुत्व का विचार करनेवाला धर्म है, तो भारत को हिन्दूराष्ट्र घोषित करने में आपत्ति क्या है?

 
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