ALL कविता लेख गीत/गजल समाचार कहानी/लघुकथा समीक्षा/पुस्तक चर्चा दोहा/छंद/हायकु व्यंग्य विडियो
सब-कुछ बदला राखी पर 
August 2, 2020 • ✍️रविकान्त सनाढ्य • कविता
✍️रविकान्त सनाढ्य
रक्षाबंधन पर बहिन कहे 
कोरोना- बंधन  भारी है ।
आना- जाना बंद हुआ 
यह कैसी महामारी है ? 
 
भैया मेरी रक्षा पीछे, 
तुम अपनी रक्षा कर लेना ।
मुझको तो बस हाथ उठाकर 
दूर से आशीष दे देना ।
 
नहीं मिठाई, नहीं नारियल 
ना राखी लाचारी है ।
डाक से राखी भेजें भी तो 
ख़तरे की तैयारी है ।
 
आऊँ भी तो आऊँ कैसे 
लॉकडाउन भी जारी है ।
घर में क्वारन्टाइन होकर 
रहना समझदारी है ।
 
धागा लेकर मेरे नाम का 
बच्ची से बँधवा लेना , 
मूंग लाल कपड़े में रखकर 
पुरानी रीत जिला देना ।
 
कोरोना ने सिखा दिया है 
परंपराएँ प्यारी हैं ।
समय आगया वही बचेगा, 
जिसने भूल सुधारी है ।
 
रिश्ते के ये कच्चे धागे 
तो मज़बूत हमारे हैं ।
स्वस्थ रहें खुशहाल रहें तो 
रिश्ते निभते सारे हैं ।
 
इस विचार को समझो कृपया 
कोरोना-आफ़त तारी है ।
नेग चाहिये नहीं न चाहत 
मेरी कोई सारी है ।
 
नियमों का पालन करना बस 
कुछ दिन की दुश्वारी है ।।
कोरोना को कम मत आँको, 
यह तलवार दुधारी है ।।
 
*भीलवाड़ा
 

अपने विचार/रचना आप भी हमें मेल कर सकते है- shabdpravah.ujjain@gmail.com पर।

साहित्य, कला, संस्कृति और समाज से जुड़ी लेख/रचनाएँ/समाचार अब नये वेब पोर्टल  शाश्वत सृजन पर देखेhttp://shashwatsrijan.com

यूटूयुब चैनल देखें और सब्सक्राइब करे- https://www.youtube.com/channel/UCpRyX9VM7WEY39QytlBjZiw