ALL कविता लेख गीत/गजल समाचार कहानी/लघुकथा समीक्षा/पुस्तक चर्चा दोहा/छंद/हायकु व्यंग्य विडियो
सावन की पहली बारिश
July 13, 2020 • मीरा सिंह 'मीरा' • कहानी/लघुकथा

*मीरा सिंह 'मीरा'
हमेशा की तरह इस साल भी सावन अपने साथ उम्मीदों का जखीरा लेकर आया था। लेकिन दस वर्षीय सुरेश का मन उदास था।वह मायूस आंखों से बालकनी में रखे गमलों को निहार रहा था। तुलसी, अड़हुल और गुलाब के पौधे बारिश की बूंदों से सराबोर हो रहे थे।
उसका बाल मन भी पहली बारिश में भीगने के लिए आतुर था। पर उसकी मां की इजाजत नहीं थी।वो उसे बाहर निकलने नहीं दे रही थीं।कुछ देर खामोश खड़ा रहा, फिर दुलार से मां के गले लिपटते हुए बोल पड़ा "प्लीज मां,बारिश में नहाने दो ना।देखो न कितनी देर से बारिश हो रही है।बादल उड़ते आ रहे हैं।उधर देखो न- - कितना अच्छा लग रहा है। पिछले साल मेरे साथ तुम भी तो बारिश में नहाई थी।भूल गई क्या?कितना मजा आया था न मां? तुम आज क्यों नहीं नहा रही हो?मुझे भी नहाने नहीं दे रही हो।बोलो न मां? मैं बालकनी में जाकर थोड़ा सा नहा लूं?"उसके शब्दों में तड़प के साथ याचना थी।
मां का मन भर आया।पर क्या करे?इस कोरोनाकाल में कठोरता का कवच धारण करना जरूरी है ।वह बेटे को प्यार से समझाई "बेटा, जिद्द नहीं करते हैं? इस साल बारिश में नहाने का मतलब मुसीबत में फंसना है। तुझे पता है ना--- कोरोना कितना बढ़ रहा है? भीगने से सर्दी खांसी हो जाएगी।इसलिए भीगने का जोखिम नहीं ले सकती?तू  समझता क्यों नहीं है? अभी हम सब को सुरक्षित और स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है।" मां अपने जगह सही थी, वह समझ रहा था पर अपने बालमन को कैसे समझाए ।आखिर था तो बच्चा ही न?उसका मन बहुत दुखी हो गया।
बुझे स्वर से पूछ बैठा " मां यह कोरोना यहां से कब जाएगा?क्या हम लोग हमेशा ऐसे ही रहेंगे ?स्कूल भी तो बंद पड़ा है।दोस्तो के साथ खेलना भी मना है ।आखिर हम करें क्या? " उसके इस सवाल से मां का मन भी व्यथित हो गया। वो उसके सिर को सहलाते हुए बोली "बेटा, यह कोरोना कब जाएगा? मैं भी नहीं जानती। पर निराश नहीं होते ।हम साथ में खेलेंगे, बाते करेंगे । जब तक कोरोना नहीं जाता है ,तब तक तो हमें सावधानी बरतनी ही होगी।" तभी बालकनी से बारिश के कुछ छींटे सुरेश के गालों पर पड़े । उसका बुझा चेहरा खुशी से खिल गया।उसे लगा कि बारिश की बूंदे उससे मिलने आई हैं।वह उल्लासित मन से बाहर की खिड़की के पास जाकर बैठ गया और बाहर देखने लगा।सावन पूरे उत्साह से झमाझम बरस रहा था।
*डुमरांव ,जिला- बक्सर, बिहार 
 

अपने विचार/रचना आप भी हमें मेल कर सकते है- shabdpravah.ujjain@gmail.com पर।

साहित्य, कला, संस्कृति और समाज से जुड़ी लेख/रचनाएँ/समाचार अब नये वेब पोर्टल  शाश्वत सृजन पर देखेhttp://shashwatsrijan.com

यूटूयुब चैनल देखें और सब्सक्राइब करे- https://www.youtube.com/channel/UCpRyX9VM7WEY39QytlBjZiw