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सावन बीता जाए
July 29, 2020 • ✍️अशोक 'आनन' • गीत/गजल
✍️अशोक 'आनन'
सावन  बीता  जाए  साजन !  सावन  बीता  जाए ।
कैसे  काटूं   रैन  अंधेरी ; नागिन  बन - बन  खाए ।
 
ठंडी - ठंडी   पवन   चलत   है ;
बादल   घिर - घिर  आएं ।
मोती     जैसी     बूंदें     बरसें ;
तन - मन   भींगा   जाए ।
 
याद तुम्हारी  दिल को साजन !  रह - रहकर  तड़पाए ।
कैसे   काटूं   रैन  अंधेरी ;   नागिन   बन - बन   खाए ।
 
मोर , पपीहा , झींगुर , सारस ;
मिलकर    शोर    मचाएं ।
नाचें  ,   कूदें ,    झूमें ,    गाएं ;
फूलें        न        समाएं ।
 
बात विरह की कोई साजन ! आज न  दिल को  भाए ।
कैसे  काटूं   रैन   अंधेरी   ;   नागिन  बन - बन  खाए ।
 
बादल    बैरी  ,  बिजली   सौतन ;
मिलकर    आग      लगाएं ।
टप  -  टप    टपकें    आंसू    मेरे  ;
काजल   धुल - धुल   जाए ।
 
सांझ - सवेरे  पथ  पर तेरे , साजन ! नैन  बिछाए ।
कैसे  काटूं  रैन अंधेरी  ;  नागिन  बन- बन  खाए ।
 
*मक्सी,  जिला - शाजापुर ( म.प्र.)
 

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