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साथ उनके लाचारियाँ हैं बहुत
June 17, 2020 • नवीन माथुर पंचोली • गीत/गजल
*नवीन माथुर पंचोली
साथ उनके लाचारियाँ हैं बहुत।
पास जिनके बेगारियाँ हैं बहुत।
 
मंजिलें  हैं  हरेक सफ़र लेकिन,
राह इनकी  दुश्वारियाँ   हैं बहुत ।
 
बोझ से झुक गया है तन उनका,
जिनके सिर पर उधारियाँ हैं बहुत ।
 
आज जीने के इंतजाम है कम,
रोज़ मरने की तैयारियाँ  हैं बहुत ।
 
लोग  सब  बच-बचाके  बैठे हैं,
घर से बाहर बीमारियाँ हैं बहुत।
*अमझेरा धार मप्र
 

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