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सामाजिक समस्याओं की कविता का संग्रह-द्वन्द
July 12, 2020 • डॉ. राजेश कुमार शर्मा 'पुरोहित' • समीक्षा/पुस्तक चर्चा
पटना के युवा रचनाकार कवि आशुतोष कुमार झा ने अपने द्वन्द काव्य संकलन में सामाजिक समस्याओं को अपनी कविताओं का विषय बनाते हुए भ्रष्टाचार भुखमरी बढ़ती महँगाई मजदूरों के ताजा हालातों के साथ ही देश के विभिन्न त्योहारों व राष्ट्रीय पर्वों पर आधारित रचनाएँ लिखी है। इस काव्य संकलन में पाठको को अंगार से लेकर श्रृंगार की रचनाएं पढ़ने को मिलेगी। काव्यानंद में डूबते पाठक आशुतोष जी की काव्य रचनाओं  से समाज सुधार ही नहीं कर सकते अपितु जिन्दगी को सुखमय बना सकते हैं। 67 रचनाओं में आपने कविता,गीत,ग़ज़ल के साथ ही छंदमुक्त रचनाएँ लिखी है।
इस कृति की प्रथम रचना बेवफाई मंजर में आशुतोष जी कहते हैं"वफ़ा तो शरीर की देखो, आत्मा से बड़ी बेवफा दूसरी न देखी।आत्मा अजर अमर है। शाश्वत है। नश्वर है शरीर । नववर्ष रचना में आप मानवीय धर्म व एकता का संदेश देते है "जीव को जीव समझ ,तभी मनेगा नववर्ष। जन्म दिन विशेष में पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी के लिए आप कहते हैं"अटल इरादों के बल पर उन्होंने भारत को मजबूत बनाने का काम किया था। हँसी काव्य रचना में आप हर समय प्रसन्न रहने की बात रखते हैं"सारी व्यथा को हँसी में उड़ा दो।
खुबसूरती में "बात का जादू सफल सफल,मदहोश करती पहर पहर। एक अच्छी रचना है। गीत शीर्षक से आपने अच्छा गीत लिखा"सुबह तुम्हीं हो शाम तुम्हीं हो,मेरी धड़कन की पहचान तुम्हीं हो। पूर्ण समर्पण के भाव है इस रचना में। स्याही और शब्द रचना में स्याही के करिश्में देखते ही बनते हैं। रोजी रोटी मकान"भूख की कोई जात नहीं। सही कहा आपने लॉक डाउन में भूखे मजदूरों को रोते देखा है। नजर शीर्षक में"नज़र नज़र की सौगात अच्छे बुरे की पहचान।" वास्तव में नज़र के पारखी सब जान लेते हैं।जरूरत की बातें"फुटपाथ पर ठिठुरते जीवन की बातें। आरक्षण रोजगार, आधुनिकता शांति भाईचारे की बातें लिखी।देखा जाए तो ये ही जरूरत की मूल बातें है हर देशवासी को इस बात पर चिंतन कर समाधान की जरूरत है।
ज्ञान का प्रकाश"उठो ज्ञान को प्रज्वलित करो।" ज्ञान के आलोक में रहना ही मानव का प्रथम कर्म है। जिज्ञासा श्रंगार की रचना बहुत पसंद आएगी पाठकों को। जिंदगी की विवशता "कहीं वैराग्य है तो कहीं योग है जिंदगी। झा साहब ने जिंदगी को अपने नजरिये से लिखा है। मौत रचना में बताया कि मौत निश्चित है एक दिन आती है।प्रवासी कविता में मेहनतकश मजदूरों की समस्याओं पर प्रकाश डाला है।बचपन कविता पढ़कर बचपन याद आ गया। अनुभव कविता में "पढ़ सकता हूँ मैं चेहरा देखकर। हर अनुभवी की यही विशेषता होती है। दुनिया,राम मन्दिर, तिरंगा बसंत,खूबसूरती,मकर सक्रांति,पर्यावरण ,गणतंत्र डिवएक्स,वायुमंडल, साईनाथ दोहा,मन्दिरऔर तारीख,शब्द,नारी सम्मान, बम बम भोले ,पतझड़ में बसंत,भजन माता के,स्याही और सौगंध,सफेद कुर्ता,उज्ज्वल हिन्दी केंद्र,चुनाव शांति,हमारा बिहार और पटना
आदि रचनाएँ त्यौहार पर आधारित व परिवेश से जुड़ी समस्याओं पर आधारित सामयिक है। बून्द बून्द जीवन रचना । जल बचाओ का संदेश देती है फगुआ की मिठास, अनोखा रंग,आराधना, कविताएं श्रेष्ठ है। बगुला कविता नेताओं पर करारा व्यंग्य है। कुर्सी मिलने के बाद नेता वादा भूल जाते है।जी हजूरी, कामदार का काम बोलता,आदि रचनाएँ महत्वपूर्ण हैं। प्रिय का साथ श्रंगार की रचना है।बेवफा,वक़्त से पहले जैसी रचनाएँ युवा पाठकों की पसंद रहेगी करची की कलम पुराने दिनों की याद दिलाती है। कवि ने अतीत व बर्तमान को जांचते हुए उत्कृष्ट सृजन किया है।पर्यावरण भाग 2 ,गरीबी,एक हो दवा,कलमकार, मुद्दे,नया जमाना एक सूरत, ख्वाब ,जलन,मुस्कराना सीखो, आदि रचनाएँ जीवन मे संघर्ष करना सिखाती है।
ऐतिहासिक संदेश में भूख,गरीबी,बेरोजगारी जैसी समस्याओं को गिनाते हुए पर्यावरण,सौर ऊर्जा ,जल संरक्षण की बातें बताना कवि ने न्यायोचित समझा। सशक्त लेखनी है झा साहब की। अटल सत्य,2020 का भारत ,एक भारत श्रेष्ठ भारत आदि सभी देशभक्ति से ओतप्रोत रचनाएँ इस कृति का प्राण है। प्रस्तुत कृति की भाषा सरल व बोधगम्य है।मूल्य भी पाठकों की पहुँच के अंदर है। एक बेहतरीन काव्य संकलन हेतु मैं आशुतोष जी को बधाई देता हूँ। आपकी यह कृति साहित्य जगत में नई पहचान बनाये।
कृति:- द्वन्द
लेखक:- आशुतोष कुमार झा
प्रकाशक:- प्रखर गूँज, नई दिल्ली
मूल्य:-225/-
समीक्षक:- डॉ. राजेश कुमार शर्मा"पुरोहित"
 

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