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रिद्धि एवं सिद्धि जैन का सर्वे एवं शोध कचरे से समृद्धि की ओर
November 18, 2019 • सोनी जैन • लेख

सुनिश्चित तरीके से जब होगा काम कचरे का भी फ़िर मिलेगा सोने सा  दाम

कचरा निस्तारण की समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।भारत में लगभग 1.5 लाख टन ठोस कचरा रोज निकलता है जिसमें से 10% कचरा तो एकत्रित भी नहीं हो पाता बाकी 80% कचरा भूमि भरण (landfill) में चला जाता है।
गाजीपुर में बना कूड़े का पहाड़ इसका साक्षात उदाहरण है।मात्र 10% कचरा ही उपयोग होता है।कचरे के छोटे तो कहीं बड़े पहाड़ आपको शहर के अंदर भी बहुतायत से देखने को मिल जाएंगे जिनसे उड़ती दुर्गंध ना केवल आपको अपनी नाक बंद कर देने पर मजबूर कर देगी बल्कि वायु प्रदूषण के कारण आपकी सांसों के साथ शरीर में भी अनेक रोगों को आमंत्रण देती है। यह मच्छरों और कीड़े मकोड़ों को पनपने की सबसे अच्छी जगह है। बरसात के दिनों में तो ऐसी जगह का वातावरण और भी नारकीय हो जाता है।

दोस्तों इस समस्या को हमने कभी ना हल होने वाली समस्या मान लिया है जबकि ऐसा नहीं है। हमने मेरठ के मोदीपुरम की कई कॉलोनियों में इसका सर्वे किया और इस समस्या से निजात पाने का आसान सा उपाय खोज निकाला।जहां मात्र आवश्यकता थी एक छोटी सी सार्थक पहल की ,जो हमने शुरू की और परिणाम भी सुखद देखने को मिल रहे हैं ।हमने सर्वे और छोटा सा शोध करने के बाद कॉलोनियों के लिए एक ऐसी भूमिगत कंपोस्ट पिट तैयार की जिससे वह अपने संपूर्ण बायोडिग्रेडेबल कचरे को उस में डालकर जैविक खाद में बदल सकते हैं ।और इस खाद का प्रयोग या तो अपने यहां के पेड़ पौधों के लिए कर सकते हैं या फिर उसे आराम से बेचा भी जा सकता है जो कि रोजगार का साधन भी बन सकता है।भूमिगत कंपोस्ट पिट की खासियत यह है कि इसे आप कॉलोनी में कहीं भी बना सकते हैं चाहे वह आपका गार्डन हो, फुटपाथ हो या पार्किंग की जगह हो।इसे बनाने के लिए आपको अलग से किसी भी खाली भूमि की आवश्यकता नहीं है ।इस पिट  के ऊपर एक मजबूत ढक्कन(lid)दिया गया है जिसे आप कचरा डालने के बाद दोबारा से पिट को ढक दीजिए। ढक्कन लगा होने के कारण आपको ना तो कोई दुर्गंध आएगी और ना ही मच्छरों के कारण बीमारियां पनपेगी । कचरे के ढेर के कारण वायु प्रदूषण एवं जल प्रदूषण जैसी किसी भी समस्या का सामना नही करना होगा। पिट बंद होने के कारण कुत्ते या अन्य कीटों का भी कोई डर नहीं रहेगा। यह एक बहुत कम लागत में बनने वाली भूमिगत कंपोस्ट पिट है जिसमे 6 से 8 माह के अंदर कचरे से जैविक खाद बन जाएगी और पिट को बनाने में लगने वाली लागत भी आराम से वसूल हो जाएगी और फिर यह पिट सालों साल काम करती रहेगी।
आप अपनी की आवश्यकता के अनुसार भूमिगत कम्पोस्ट पिट को छोटा या बड़ा कर सकते हैं। हमने जो कंपोस्ट पिट शीलकुंज मोदीपुरम ,मेरठ में तैयार की है जो कि 50 परिवारों के एक माह के बायोडिग्रेडेबल कचरे के लिए काफी है।जिसकी लंबाई 1.5 मीटर ,चौड़ाई 1मीटर तथा गहराई 1.5 मीटर है।इस मॉडल को सफल बनाने के लिए हमे आवश्यकता थी तो मात्र कचरे को तीन अलग-अलग कूड़ेदानो में लेने की और ऐसा ही हमने किया। हमने हर घर से हरे रंग के कूड़ेदान में गीला तथा बायोडिग्रेडेबल कचरा दूसरे नीले रंग के कूड़ेदान में हमने समस्त ठोस कचरा जिसमें पैकिंग मटेरियल,प्लास्टिक,कांच, लोहा आदि कचरा था जिसे हम दैनिक रूप से कबाड़ी वालों तथा कूड़ा बीनने वालों की मदद से निस्तारित कर देते है। बाकी बचा 10 से 20% कचरा जो जिसमें सैनिटरी नैपकिंस ,डायपर्स या ऐसे प्रदार्थ जोकि घातक हो सकते है,को लाल रंग की डस्टबिन में लेते हैं।कलोनी में अलग से डस्टविन की व्यवस्था की है जिस में इन्हें डाल दिया जाता है और बाद में नगरपालिका वाले आकर उस कचरे को ले जाते हैं और उसका उचित निस्तारण कर देते हैं ।इस प्रकार संपूर्ण कचरे का 80 से 90% भाग कालोनी में ही प्रयुक्त हो जाता है कॉलोनी के गेट से बाहर नहीं जाता। जैविक खाद के रूप में हमें अब आने वाले कुछ महीनों में ऐसा सोना मिलेगा जो न केवल मिट्टी की सेहत को सुधरेगा बल्कि हमारे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता में भी आमूलचूल परिवर्तन लेकर आएगा। भूमिगत कंपोस्ट पिट के माध्यम से खाद 6 से 8 माह में तैयार हो जाती है।जैविक खाद जितनी कॉलोनी में इस्तेमाल की जा सकती है की जाएगी और बाकी की खाद को  बेच दिया जाएगा ।जिससे पिट के रखरखाव का खर्चा भी आराम से निकल जाएगा। इस प्रकार हमारे एक छोटे से प्रयास से हमारी सोसाइटी एक कचरा मुक्त सोसाइटी बन गई है।ऐसे ही हमारे शहर व देश भी कचरा प्रबंधन करके कचरे से समृद्धि की ओर बढ़ सकते है ।

खाद-गड्ढों को कालोनियों में बनाएंगे
कचरे का निदान वहीं पर कर पाएंगे

*सोनी जैन
1164 शीलकुंज, मोदीपुरम,मेरठ
मेल:sonijain1203@gmail.com
 

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