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रक्षाबंधन बनाम-सुरक्षा बंधन
August 2, 2020 • ✍️सुजाता भट्टाचार्य • कविता
✍️सुजाता भट्टाचार्य
भारत देश की है छटा निराली,
इस देश में हर पर्व मनाए,
करने को इक-
दूजे की रखवाली,
रक्षाबंधन भी है
एक ऐसा ही त्योहार,
जो बन गया है,
यहां के भाई-बहनों के
गले का हार।
हर भाई प्रण लेता,
सुनेगा बहन की पुकार,
बहन भी ईश्वर से लगाए,
भाई के जीवन की गुहार ‌।
स्नेह,आशीशों से सदा
मनाया जाता यह त्योहार,
नहीं कामना बहनों की,
भाई दे कीमती उपहार,
भाई-बहन का 'रक्षाबंधन' है
बढ़ाए उनका आपसी प्यार।
नहीं है ये बंधन,
केवल बहन-भाई का त्योहार,
यह तो चाहे बांधना,
विश्व-बंधुत्व हर बार।।
हर वर्ष रहता सबको
इस दिन का इंतजार,
इस वर्ष भी आ गया,
यह पवित्र पर्व बन सावन की फुहार।
हर बार इसके आने से भाई-बहन के
दिलों में मच जाता कोहराम,
लेकिन इस बार ये पर्व आया,
लिए जीवन में अल्पविराम।
वैसे तो रक्षाबंधन की है छटा निराली,
पर इस बार हो गई कम खुशहाली।।
मनाएंगे संभल कर यह पर्व,इस बार यों,
रक्षासूत्र बांध इक-दूजे को भाई-बहन,
कर लेंगे हम इक-दूजे के दुखों को वहन।
सुरक्षित हो मनाओ रक्षाबंधन,
बन जाए यह डोर सुरक्षा-बंधन,
हो जाए रोगमुक्त जन-जन।।
होगी अगर ईश्वर की अनुकंपा,
रक्षाबंधन,बन जाएगा सुरक्षा-बंधन,
हां-करो इस पर्व का अभिनंदन,
बन जाएगा यह सुरक्षा-बंथन...... ।।।

*नई दिल्ली
 

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