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राम जगत का सार है
August 8, 2020 • ✍️पथिक पुखराज • कविता
✍️पथिक पुखराज
राम जगत का सार है ,
जीवन का आधार ।
नाम सदा जपते रहो ,
खुशियाँ मिले अपार ।
 
जग को हम क्या दे भला ,
देते हैं श्री राम ।
कृपा उनकी बनी  रहे ,
हो जाये सब काम ।
 
राम साधना कीजिऐ ,
पूरे हो सब काम ।
राम जरूर ले जाएं, 
आपको तीर्थ धाम ।
 
राम कृपा सबको मिलें ,
पढ़ रामायण रोज ।
खत्म सभी हो जायगी, 
तेरी सारी खोज ।
 
देख सामने राम को, 
शबरी हुई अधीर ।
मनसा पूरी  हो गई ,
बहे नयन से नीर ।
 
राम दिलों में बसे हुवे ,
घर-घर मंगल  गाएंगे ,
तंबू में बहुत रह लिये ,
अब तंबू भी हट जाएंगे, 
लौटे दिन अयोध्या के ,
अब मंदिर भव्य बनाएंगे ।
*नागदा 
 

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