ALL कविता लेख गीत/गजल समाचार कहानी/लघुकथा समीक्षा/पुस्तक चर्चा दोहा/छंद/हायकु व्यंग्य विडियो
राखी के दोहे
July 28, 2020 • ✍️प्रो.शरद नारायण खरे • दोहा/छंद/हायकु

✍️प्रो.शरद नारायण खरे

राखी ने फिर से दिया,इक नेहिल पैग़ाम ।
बहना का ख़त बांचता,सावन यहअभिराम ।।

धागा दिन पर दिन हुआ,और-और मजबूत ।
भाई का तो कर हुआ,संरक्षा का दूत ।।

रोली बनकर के दुआ,गर्वित करती माथ ।
हर युग,हर पल,हर जनम,भाव निभाते साथ ।।

गाता रक्षापर्व नित,शुभ-मंगल के गीत ।
हो चाहे परदेश में,राखी जाती जीत ।।

बिन चिट्ठी,बिन तार के,पहुंचा करते भाव ।
बहना-भाई नेह का,अलग हमेशा ताव ।।

यादों में हरिया रहा,बचपन का हर रूप ।
सावन के पल थे सुखद,देते अब भी धूप ।।

सावन अपने आप में,है पूरा इक ग्रंथ ।
राखी में तो है बसा,पूरा मज़हब,पंथ ।।

मन उजले सबके हुये,शेष रहा न मैल ।
रक्षाबंधन पर्व पर,अपनेपन की गैल ।।

आशीषों का दौर है,त्याग भरा संसार ।
लाज निभे जब सूत की,बस तब ही है सार ।।
                       
*मंडला(मप्र)

 

अपने विचार/रचना आप भी हमें मेल कर सकते है- shabdpravah.ujjain@gmail.com पर।

साहित्य, कला, संस्कृति और समाज से जुड़ी लेख/रचनाएँ/समाचार अब नये वेब पोर्टल  शाश्वत सृजन पर देखेhttp://shashwatsrijan.com

यूटूयुब चैनल देखें और सब्सक्राइब करे- https://www.youtube.com/channel/UCpRyX9VM7WEY39QytlBjZiw