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राखी आई
August 2, 2020 • ✍️प्रेम बजाज • कविता
✍️प्रेम बजाज
आया सावन राखी आई बहना प्यारी फूली ना समाई 
रौली-मौली, राखी- मिठाई इन सबसे थाल सजाई  ।
तिलक करती , बलैयां लेती भाई की आरती उतारती 
प्रीत के इन धागों के संग भाई पर अपना प्यार बरसाती ।
 
बहना भाई को बांधे एक सूत का कच्चा धागा 
भाई भी  रक्षा का  बहना को  है  करता वादा ।
सब  दु:ख - सुख  बहना  तेरे  हर  लूंगा  मैं 
आंच  तुझ  पर  कभी  भी  ना आने  दूंगा  मैं ।
 
रेशम के धागे में हमको अनमोल हैं लगते 
हीरे-जवाहरात भी इनके सामने फीके लगते ।
बहना रूठे भाई मनाए, भाई रूठे बहना मनाती 
जिनकी बहना प्रदेश बसे याद उनकी बहुत सताती ।
 
रंग- बिरंगे इन धागों में देखो कैसा प्यार है छुपा 
इन धागों में भाई के लिए बहन बांध देती दुआ 
श्रावण मास की शुक्ल पूर्णिमा को सब राखी मनाओ 
एक- दूजे पे प्यार लुटाओ भाई अपने से तोहफ़े पाओ ।
 
*जगाधरी ( यमुनानगर ) 
 

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