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राही और मंज़िल
June 24, 2020 • अतुल पाठक • कविता
*अतुल पाठक
 
मुश्किलें तमाम हों पर
छोड़ता नहीं आस है
 
मेहनत का तज़ुर्बा रखता
संग राही के दृढ़विश्वास है
 
राही न माने हार कभी
साथ चलतीं उम्मीदों की धार सभी
 
सरिता की गति न रुकती है
चाहे आएं पथ में कई चट्टान
 
नायाब मंज़िल तब मिलती है
जब भरता राही हौंसलों की उड़ान
 
*जनपद हाथरस(उ.प्र)
 

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