ALL कविता लेख गीत/गजल समाचार कहानी/लघुकथा समीक्षा/पुस्तक चर्चा दोहा/छंद/हायकु व्यंग्य विडियो
प्यार का सागर दिल में रखता पिता
June 21, 2020 • प्रेम बजाज • कविता
*प्रेम बजाज
प्यार का सागर दिल में
रखता पिता, 
बच्चों की हर खुशी का
ख़्याल रखता पिता  ।
बिन बोले हर बात बच्चों की
समझ जाता पिता , 
बच्चों की हर तकलीफ़ से
हिल जाता पिता ।
कभी बच्चों की आंखों में
आंसु ना आने देता पिता, 
खुद चाहे  दिल ही दिल में
रोता पिता  ।
 
सो जाते जब चैन से
बच्चे रातों में
उठ-उठ कर उनके सिरों पर
हाथ फिराया पिता ।
बच्चों की हर ख़्वाहिश को
पूरा करने की
जद्दोजहद में रहता पिता ।
सब की इच्छाओं
और खुशियों का
ख़्याल रखता पिता ।
पढ़ -लिख कर बच्चे
आसमान की बुलंदियों को छू ले , 
इसलिए बड़े स्कूल में
दाखिला दिलाने को
ओवर-टाईम या डबल-शिफ़्ट भी
करता पिता । 
अपने जुतों के तले घिस गए
मगर बेटे के जुतों की
सिलाई तक भी ना
उधड़ने देता पिता ।
 
बेटी की शादी ,
बेटे को मकान ,
बहु को खुशी ,
दामाद को मान देता पिता ।
बेटी की बिदाई पर
छुप-छुप कर रोता पिता ,
ख़्याल रखना मेरी बेटी का
हाथ जोड़ कर कहता पिता ।
आप का कुछ नहीं हो सकता ,
आप को कुछ पता भी है , 
ये सुनकर भी चुप रह जाता पिता ।
हर संकट में पतवार बन खड़ा ,
ज़िन्दगी की धूप में घना साया , 
धरती पर ईश्वर का रूप पिता ।
*जगाधरी ( यमुनानगर ) 
 
 

अपने विचार/रचना आप भी हमें मेल कर सकते है- shabdpravah.ujjain@gmail.com पर।

साहित्य, कला, संस्कृति और समाज से जुड़ी लेख/रचनाएँ/समाचार अब नये वेब पोर्टल  शाश्वत सृजन पर देखेhttp://shashwatsrijan.com

यूटूयुब चैनल देखें और सब्सक्राइब करे- https://www.youtube.com/channel/UCpRyX9VM7WEY39QytlBjZiw