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पुस्तक पर्व का आयोजन
May 14, 2020 • पुनिता भारद्वाज • समाचार

विश्ववाणी हिंदी संसथान जबलपुर द्वारा साहित्य जगत में अभिनव मापदंड स्थापित करते हुए अंतर्जाल पर राष्ट्रीय छंद पर्व, लघुकथा पर्व,  गीत पर्व, गद्य पर्व, हिंदी ग़ज़ल पर्व, विमर्श : कोरोना अभिशाप में वरदान, कला पर्व, बाल पर्व, लोक पर्व के सफल आयोजन के बाद पुस्तक पर्व का आयोजन दिनाँक १३-५-२०२० को किया गया। माँ शारदा के सम्मुख दीप प्रज्वलन के पश्चात् इंजी। दुर्गेश ब्योहार ने ललित स्वर में आचार्य संजीव  वर्मा 'सलिल' लिखित सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इस आयोजन में मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, उत्तरप्रदेश, दिल्ली आदि  के साहित्यकारों ने अपनी मनपसंद पुस्तक पर विमर्श किया। ख्यात अभियंता-उपन्यासकार अमरेंद्र नारायण ने जो. तुलसीदास रचित महाकाव्य रामचरित मानस की चर्चा करते हुए इस कालजयी कृति के आरंभ में छंद वंदना का उल्लेख करते हुए इसे साहित्य-धर्म-अध्यात्म का संगम निरूपित किया। हिंदी वांग्मय के प्रथम नवगीतिकाव्य कुमार रविंद्र रचित 'अप्प दीपो भव' का उल्लेख करते हुए आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' ने टी.एस. इलियट, पोकाक,एबरकोम्बी आदि पाश्चात्य तथा डॉ. नगेंद्र,  डॉ. श्याम नाथ शर्मा,  डॉ. सिद्धनाथ कुमार आदि का उल्लेख करते हुए इस नवगीतीय कृति को नवगीत विधा को नव आयाम में प्रतिष्ठित  करने वाली कृति निरूपित किया। श्री आलोक श्रीवास्तव ने उपन्यास एकता और शक्ति लेखक अमरेंद्र नारायण पर प्रकाश डालते हुए उसे राष्ट्रीय नवनिर्माण की दिशा में सम्यक सन्देश वाही बताया।  चर्चित नवगीत-दोहाकार बसंत शर्मा में आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' के नवगीत संग्रह 'काल है संक्रांति का' की समीक्षा करते हुए उसे नवगीत में छंद-प्रयोग की प्रयोगशाला निरूपित किया। चर्चित समीक्षक सुरेंद्र पवार नेब स्व. श्यामनारायण पांडेय की कृति हल्दीघाटी महाकाव्य की सटीक समीक्षा प्रस्तुत की। टीकमगढ़ ग्रह के चर्चित साहित्यकार राजीव नामदेव राणा लिघौरी ने यदुकुलनंदन खरे के उपन्यास 'करम अभागा' में शिक्षित बेरोजगारों की समस्या पर उठाये गए सवालों को सरकारों के लिए दिशादर्शक बताया। 

दिल्ली से सहभागी सुषमा शैली ने युगकवि धूमिल के काव्यसंग्रह 'संसद से सड़क तक' को हिंदी कविता को नकारात्मकता के कारागार से निकालनेवाली कृति बताया। लघुकथा लेखन पर प्रश्नोत्तरों की पुस्तक 'लघुकथा संवाद' संपादिका कल्पना भट्ट पर चर्चा करते हुए मनोरमा जैन 'पाखी' ने २० प्रश्नों ने २१ वरिष्ठ लघुकथाकारों द्वारा दिए गए उत्तरों में मतभेद को स्वाभाविक किन्तु पुस्तक को लघुकथाकारों हेतु आवश्यक बताया। दतिया के अरविन्द श्रीवास्तव असीम ने भगवती प्रसाद कुलश्रेष्ठ की काव्यकृति 'अमलतास खिल रहा' की चर्चा करते हुए कवि के काव्य कौशल के उदाहरण दिए। डॉ. राजलक्ष्मी शिवहरे ने रुद्राक्ष पर गोंदिया निवासी डॉ. श्रीश कुमार की शोधपरक कृति के हिंदी अनुवाद 'ईश्वरीय  किताब की चर्चा की। डॉ. मुकुल तिवारी द्वारा आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' के नवगीत संग्रह 'सड़क पर' सारगर्भित समीक्षा प्रस्तुत की। मशहूर शायर यूनुस अदीब ने ख्यात उपन्यासकार कमलेश्वर की कृति 'कितने पाकिस्तान' पर सटीक समीक्षा प्रस्तुत की। छंदाचार्य श्रीधर प्रसाद द्विवेदी ने रामानंद शुक्ल रचित जगजननी सीता पर केंद्रित प्रबंध काव्य 'जानकी जय' की चर्चा करते हुए इसे मानस के तुल्य लालित्य से परिपूर्ण बताया। 

प्रो. श्वेतांक किशोर अंबष्ट ने  १९ विज्ञान गल्प के संग्रह 'बीता हुआ भविष्य' संपादक कोंडके की सम्यक समीक्षा की। छाया सक्सेना ने दोहा शतक मञ्जूषा के तीन भागों दोहा सलिला निर्मला, दोहा दोहा नर्मदा तथा दोहा दिव्य दिनेश संपादक आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' की समीक्षा करते हुए उन्हें संग्रहणीय तथा अभूतपूर्व बताया।  सिरोही के वरिष्ठ साहित्यकार छगनलाल गर्ग 'विज्ञ' ने  विशंभरनाथ शुक्ल रचित हिंदी ग़ज़ल संग्रह 'मन कस्तूरी हो गया',  आलोक रंजन ने कृष्ण कुमार के कहांनी संग्रह 'चूड़ी बाजार में लड़की', अरुण भटनागर ने मीनाक्षी शर्मा 'तारिका' कृत  काव्य संग्रह 'सत्व',  भारती नरेश पाराशर ने 'वृद्धावस्था में सुख', रजनी शर्मा रायपुर ने शिवानी कृत कृष्णकली, मिथलेश बड़गैया ने हरिशंकर दुबे की लघु काव्य कृति 'पाठशाला', भावना दीक्षित ने डॉ. राजलक्ष्मी शिवहरे के कहानी संग्रह योगिनी पर अपने विचार व्यक्त किये। पलामू के प्रो. आलोक रंजन ने कार्यक्रम का सुचारु संचालन किया। विश्ववाणी हिंदी संस्थान जबलपुर की यह आयोजना साहित्यकारों में बहुचर्चित है। 

विशेष अतिथि सुरेंद्र पवार ने साहित्य के अल्पमोली किये जाने को आवश्यक बताया। मुख्य अतिथि श्रीधर प्रसाद द्विवेदी ने पुस्तक पर्व में २७ पुस्तकों की समीक्षा को अभूतपूर्व निरूपित किया। कार्यक्रम के अध्यक्ष उपन्यासकार समाजसेवी श्री अमरेंद्र नारायण ने   आभार प्रदर्शन लघुकथाकार बबिता चौबे 'शक्ति' ने किया। 

 

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