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psyche talk-2 ( मन की बात-2)
March 4, 2020 • सोनी जैन • लेख

दोस्तों psyche talk ( मन की बात) श्रंखला में आज एक ऐसा विषय उठाएंगे जो कि 70 से 75 प्रतिशत बीमारियों का मूल कारण है ।भारत की 89  प्रतिशत जनसंख्या इससे ग्रसित है ,लेकिन फिर भी लोग इस बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टर के पास नहीं जाना चाहते।भारत में यह समस्या यू के,यू एस ए फ्रांस ,जर्मनी आस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों से भी कहीं ज्यादा है।एक सर्वे के अनुसार डॉक्टर के पास जाने वाले मरीजों में हर चार में से एक मरीज इसी बीमारी से ग्रसित है।भारत में रोड एक्सीडेंट के बाद आत्महत्या द्वारा 15 से 30 वर्ष की आयु के लोगो की मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण भी यही है।

जी हां आपने सही समझा हम बात कर रहे हैं तनाव की।तेजी से बदलते हुए समय में जबकि व्यक्ति अधिक से अधिक पैसा कमाना चाहता है, आर्थिक रूप से सम्पन्न होना चाहता है ,एक दूसरे से आगे निकलने की हर तरफ होड़ लगी है ,नैतिक मूल्य समाप्त होते जा रहे हैं ।सूचना क्रांति और टेक्नोलॉजी के बढ़ते दायरे में भावनात्मक और संवेदनात्मक संबंधों का  महत्व कम होता जा रहा है, जिससे तनाव लगातार बढ़ रहा है और हमारी शारीरिक एवं मानसिक बीमारियों का मूल कारण बन गया है।

क्या है तनाव? दोस्तों जब भी हमारे जीवन में कोई ऐसी घटना या परिस्थिति उत्पन्न होती है जबकि हमारा व्यवहार सामान्य नहीं रह पाता औऱ हम अपने आपको मानसिक और शारीरिक रूप से डिस्टर्ब महसूस करते हैं तो यह स्थिति तनाव की स्थिति होती हैं और जो कारक इस स्थिति को उत्पन्न करते हैं उन्हें हम स्ट्रेसर्स(stressors)कहते हैं। 
आइए और आसान तरीके से समझते हैं - उदाहरण के तौर पर रमेश को परीक्षा कक्ष में अपना पी.सी.एस की मुख्य परीक्षा देने के लिए 9:30 रिपोर्ट करना था परंतु रास्ते में उसका स्कूटर खराब हो गया। उसने कई बार अपना स्कूटर स्टार्ट करने की कोशिश की लेकिन स्कूटर स्टार्ट नहीं हुआ। उसे क्रोध आया कि स्कूटर को भी अभी खराब होना था और साथ ही उसे चिंता भी सताने लगी कि यदि मैं समय पर नहीं पहुंचा तो मेरी परीक्षा छुट जाएगी।उसको घबराहट होने लगी और मुंह सूखने लगा। रमेश के लिए यह तनाव की स्थिति थी। यह स्थिति तब तक चली जब तक समय पर  परीक्षा देने के लिए उसे लिफ्ट नहीं मिली। तनाव कितने समय तक रहेगा यह तनाव उत्पन्न करने वाली स्थिति या घटना पर निर्भर करता है। जब व्यक्ति तनाव में होता है तो उसके अंदर बहुत से मनोवैज्ञानिक और शारीरिक परिवर्तन आते हैं यह परिवर्तन तब तक बने रहते हैं जब तक वह परिस्थिति रहती है।
 दोस्तों तनाव दो प्रकार का होता है यूस्ट्रेस(eustress)और डिस्ट्रेस(Distress) यूस्ट्रेस हमारी परफॉर्मेंस को बढ़ा देता है जैसे परीक्षा से पहले होने वाला तनाव हमें परीक्षा की तैयारी के लिए प्रेरित करता है जबकि डिस्ट्रेस हमें मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान करता है।
दोस्तों तनाव हमारे जीवन को किस प्रकार से प्रभावित कर रहा है। कौन-कौन से रोग हमें मात्र तनाव की वजह से हो रहे हैं, इनका क्या उपचार है इन सब को जाने से पहले यह जान लेना बहुत आवश्यक है कि आखिर तनाव,चिंता और उदासीनता में क्या अंतर है? दोस्तों यदि हम तनाव चिंता और उदासीनता के लक्षणों को देखें तो कम या ज्यादा रूप में हमें यह एक समान दिखाई देते हैं परंतु वास्तव में यह तीनों एक नहीं है। दोस्तों तनाव जीवन में आने वाली चुनौतीपूर्ण घटनाओं के प्रति हमारी प्रतिक्रिया है जैसे तबीयत खराब होने के कारण राहुल पूरी रात नहीं सो पाया जबकि अगले दिन ऑफिस में उसकी महत्वपूर्ण मीटिंग थी। ऐसे में राहुल तनाव में था कि पता नहीं  मीटिंग में उसका  महत्वपूर्ण प्रस्तुतिकरण (presentation) कैसा रहेगा? यदि प्रस्तुतिकरण ठीक हो जाता है तो इस स्थिति में उत्पन्न हुआ तनाव भी खत्म हो जाएगा। परंतु प्रस्तुतिकरण खराब होने पर राहुल को चिंता सताने लगती है कि कहीं बॉस मुझे नौकरी से निकाल दें। जब तनाव की स्थिति लंबी चलती है तो वह चिंता एवं उदासीनता उत्पन्न करती हैं। दोस्तो चिंता में व्यक्ति अक्सर क्रोधित एवं आक्रामक हो जाता है, परंतु उदासीनता (Depression) में व्यक्ति  परिस्थिति से हार मान लेता है ।उदासीनता की स्थिति में व्यक्ति बात नहीं करना चाहता, उसे आवाज बर्दाश्त नहीं होती, काम करने का मन नहीं होता, सब कुछ छोड़ कर कहीं भाग जाना चाहता है, उसे नींद बहुत आती है और यही उदासीनता आत्महत्या का कारण भी बन जाती है।
दोस्तो दैनिक जीवन में अक्सर छोटी-छोटी परिस्थितियां से तनाव की स्थिति बन जाती हैं जैसे- बच्चों का यदि गृह कार्य पूरा नहीं हुआ तो टीचर गुस्सा करेगी ये उनके लिए तनाव की स्थिति बनती है। महिलाओं के लिए घर में मेहमान आने वाले हैं तनाव की स्थिति है और इस पर भी यदि कामवाली बाई नहीं आई है तो और भी अधिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।इसी प्रकार पुरुषों के लिए ऑफिस जाते समय रास्ते मे यदि बहुत ज्यादा जाम मिल जाए तो तनाव की स्थिति है ।बुजुर्गों की तबीयत खराब होने पर उनमें तनाव उत्पन्न हो जाता है। जब किसी परिस्थिति में तनाव लंबा खिंच जाता है तो चिंता एवं उदासीनता के लक्षणों के साथ-साथ अन्य मनोवैज्ञानिक एवं शारीरिक लक्षण भी दिखाई पड़ने लगते हैं ।जैसे नौकरी छूट जाने पर तनाव की स्थिति पैदा होती है परंतु काफी लंबे समय तक नौकरी ना मिलने पर तनाव बढ़ता चला जाता है।
 दोस्तों तनाव के अनेक कारण हैं और आजकल तो तनाव हर छोटी छोटी बात को लेकर हो जाता है क्योंकि हम लोग 100 साल की जिंदगी को 10 साल में जी लेना चाहते हैं।आर्थिक समस्याएं, किसी अपने की मृत्यु, लंबी बीमारी,किसी अप्रिय घटना का घटित हो जाना, कार्यस्थल के वातावरण का अच्छा न होना पारिवारिक कलह आदि ऐसे बहुत से कारण हैं जिनसे तनाव उत्पन्न होता है।
दोस्तो तनाव किस तरह से हमारी जिंदगी को हर पल खोखला कर रहा है क्या - क्या मनोवैज्ञानिक, शारीरिक और सामाजिक समस्याएं इससे पैदा हो रही है। तनाव का सामना हम किस प्रकार कर सकते हैं यह जानना बहुत जरूरी है।
psyche talk(मन की बात) के अगले लेख में जीवन की सच्ची  घटनाओं के माध्यम से इन सभी पहलुओं को समझेंगे।  क्रमशः...
सोनी जैन
स्वतंत्र  लेखिका - मनोविज्ञान, मेरठ
Mail ID - sonijain1203@gmail.com




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