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प्रेम में तुमसे ज्यादा दीवाना कोई नहीं होगा चिंटूजी
April 30, 2020 • सुशील कुमार 'नवीन' • लेख

*सुशील कुमार 'नवीन'

बहुत याद आओगे सरगम के रवि बाबू। क्योंकि प्रेम में तुमसे ज्यादा दीवाना कोई हो ही नहीं सकता। तुम तो प्यार के सागर रहे हो। लैला भी मजनूं की इन नीली-नीली आंखों में डूबने से नहीं बच पाई थी। तुमने ही तो हिना के चांद और चांदनी के चन्दर बनकर इसे और अमरता प्रदान की थी। बोल राधा बोल में राधा के किशन बन तुमने जो मुरली बजाई वो आज भी कानों में मधुर रस घोल रही है। तुम्हें भुलाना भी चाहें तो भी नहीं भूल सकते कुछ तो है.. के प्रोफेसर बक्शी। पर्दे पर तुम्हारे आने से ही डर जाते थे अग्निपथ के राउफ लाला। स्टूडेंट ऑफ द ईयर के मनमौजी डीन वसिष्ठ,भले ही तुम प्रेम रोगी रहे हो परन्तु तुमनें  वीर सिंह बन उस लव में आज और कल में कोई फर्क नहीं आने दिया।

तुम तो राजू बन पहले ही दिन ‘बॉबी' के मन को भा गए थे। फिर हमारी तो बिसात ही क्या। हम तो उस मासूम चेहरे के साथ ‘मैं शायर तो नही मगर ए हंसीं जब से देखा मैंने तुमको शायरी आ गई’ गुनगुना चाहते हैं। काजल के दीवाने के रूप में हम सदा पेडों के झुरमुट में ‘ तेरी इसी अदा पे सनम मुझको तो प्यार आया’ गाते देखना चाहते थे।पर तुम तो तो’तेरे दर्द से दिल आबाद रहा, कुछ भूल गए कुछ याद रहा’ गाकर हमसे दूर चले गए। हमें तो  स्विजरलैंड की वादियों में चांदनी रूपी श्रीदेवी के साथ ‘तेरे मेरे होठों पे मीठे-मीठे गीत मितवा’ सुनने की आदत सी पड़ी हुई थी अब हम ‘लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है’ गाकर आंसुओं का सैलाब कैसे लाएं। तुम ने तो सागर के रवि बन ‘चेहरा है या चांद खिला है’ या सागर किनारे दिल ये पुकारे तू जो नहीं तो कोई नहीं है’ गाकर हमारे साथ जो दिल का रिश्ता जोड़ा था उसे हम ‘सच मेरे यार है, बस वही प्यार है,बाकी बेकार है, यार मेरे...गाकर किस तरह तुमसे अलग हो जाएं। भले ही तुम हिना के चन्दरप्रकाश बन ‘ मैं देर करता नहीं देर हो जाती है..’ गाते हुए आते रहो, मगर’ जाने वाले ओ जाने वाले, किया तुझे हमने खुदा के हवाले ..गाकर विदा करना हमारे बस की बात नहीं है। हम तो तुम्हें नसीब के  ‘चल मेरे भाई तेरे हाथ जोड़ता हूं, तेरे पांव पड़ता हूं. गाते उस छोटे और चुलबुले भाई सनी के रूप में याद रखेंगे। फिर तुम हमें कुली का ‘ मुझे पीने का शौक नहीं, पीता हूं गम भुलाने को..गाने को मजबूर कर क्यों चले गए। हमें तो अमर अकबर एंथोनी का ‘सैयद अली प्यार का दुश्मन हाय हाय, मेरी जान का दुश्मन हाय-हाय.. गाने वाला अकबर हमेशा याद रहेगा।

दामिनी का शेखर गुप्ता याद रहेगा जो अपनी पत्नी को ‘गवाह है चांद तारे गवाह..गा अपने प्रेम को अमरत्व प्रदान करता दिखेगा। हमें कभी-कभी का विक्की खन्ना सदा अपनी प्रेयसी पिंकी के लिए ‘प्यार कर लिया तो क्या, प्यार है कोई खता नहीं.. गाता याद रहेगा। नगीना का राजीव बन ‘आज कल कुछ याद रहता नही, एक बस आपके आने के बाद..सुनाते रहते तो बड़ा अच्छा लगता पर तुम तो हमें ‘भूली बिसरी एक कहानी..सुनाकर गमगीन कर गए। हो सके तो हमें ‘हम किसी से कम नहीं का बचना ए हसीनों लो मैं आ गया..कर्ज का मेरी उम्र के नौजवानों या बॉबी का जूठ बोले कव्वा काटे…सुनाने फिर आ जाना। जाते-जाते सबके प्यारे चिंटू जी तुम्हारी ही फ़िल्म लैला मजनूं का ये गीत हमसे भी सुन लो-

बरबाद-ए-मोहब्बत की दुआ साथ लिए जा
टूटा  हुआ  इकरार-ए-वफ़ा  साथ  लिए  जा
इक दिल था जो पहले ही तुझे सौंप दिया था
ये जान भी ऐ जान-ए-अदा साथ लिए जा।

*सुशील कुमार 'नवीन' ,हिसार

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