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प्रेम की दौलत
April 22, 2020 • सुनील कुमार माथुर • लेख

*सुनील कुमार माथुर
इस नश्वर संसार में इंसान एक यात्री के रूप में आया है और यह कब चला जायेगा कोई पता नहीं । चूंकि य। संसार तो एक सराय के समान है जहां पर यात्री आता है और अपने कार्यों को करके  चला जाता है । वह यहां पर स्थायी रूप से निवास नहीं करता है । जब परमात्मा ने हमें इस नश्वर संसार में रहने का समय दिया है और मानव जीवन दिया है तो फिर हम क्यों अपना समय बर्बाद कर रहे है किसी परोपकारी कार्य में लगाये तो बेहतर है । सुबह - शाम ईश्वर का स्मरण करे और भजन-कीर्तन व कथा करें । सत्संग करें । इससे प्रेम  , नम्रता व सहनशीलता जैसे दिव्य गुणों का जीवन में संचार होता है व ब्रह्म की प्राप्ति से भ्रम की समाप्ति हो जाती है ।
परमात्मा की पहचान सदगुरू के बिना सम्भव नहीं है । परमात्मा व सदगुरू पर विश्वास करने वाले और प्रभु से प्रेम करने वाले कभी भी किसी का बुरा नहीं कर सकते । ईश्वर की भक्ति करने से मनुष्य का जीवन सुखमय बन जाता है । परमात्मा एक है और सर्वव्यापी है । हमें सेवा , सत्संग व सुमरन के रास्ते पर चलना होगा तभी हमारी जीवन यात्रा आनन्दमय हो सकती है । जब भी मानवता पर दानवता हावी हुई तब - तब मानवता को पुनः स्थापित करने हेतु सदगुरू आते रहें । 
अगर हम में  करूणा, प्रेम, स्नेह , त्याग व बलिदान की भावना है । दूसरों के दुःख को दूर करने की क्षमता है तो दुखी व्यक्ति की मदद अवश्य करनी चाहिए । हम अपने प्रति जैसा व्यवहार चाहते है वैसा ही व्यवहार दूसरों के संग करना चाहिए । यही मानवता है । अच्छे संस्कारों से ही धरती स्वर्ग बन सकती है । धरती पर स्वर्ग का वातावरण स्थापित करने के लिए दया , प्यार , करूणा  , ममता व वात्सल्य  , भाईचारा, विश्व बंधुत्व की भावना आवश्यक है । सपूतों महापुरुषों ने सदा प्यार मौहब्बत का सन्देश दिया है ।
हमें दूसरों की बुराइयों को नहीं अपितु गुणों को अपनाना चाहिए अन्यथा हीरे जैसा मानव जीवन व्यर्थ चला जायेगा । प्रेम की दौलत बांटते जाइये । इसे आप जितना दूसरों में बांटेंगे यह उतनी ही अधिक बढती जायेगी । सदैव परोपकार के कार्य करें । मानव जीवन को मायाजाल के चक्कर में बर्बाद न करें और सदैव सत्य के मार्ग पर चलें । सहनशीलता से ही आध्यात्मिकता मजबूत होती है । अतः मानवीय मूल्यों को जीवन में आत्मसात करें । आज नैतिक मूल्यों का जो हास हुआ है उसके पीछे मूल कारण यही है कि इंसान ने इंसानियत को ही भूला दिया है ।
 
*सुनील कुमार माथुर ,जोधपुर, राजस्थान 
 

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