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प्रकृति ,मानव और कोरोना
March 29, 2020 • प्रीति शर्मा "असीम" • कविता

*प्रीति शर्मा "असीम"

प्रकृति और मानव का ,
जब तक संतुलित साथ रहेगा।
 
 जीवन की धारा का,
 निरंतर तभी तक विस्तार रहेगा।
 
कद्र मानव जब तक प्रकृति की।
नहीं करेगा। 
 
तब तक आपदाओं का ,
ऐसे ही मचता संहार रहेगा।
 
 प्रकृति और मानव का,
 जब तक संतुलित साथ रहेगा।
 
 मानव ने प्रकृति से ,
जब -जब है खेला ।
 
कभी भूकंप .....
कभी सुनामी ......
अब आकर भीषण आपदा ,
कोरोना आ घेरा।
 
प्रकृति को संभालो ,
यह रक्षक है मानव की ,
न दौड़ो विकास की अंधी दौड़। 
कहीं नहीं मिटेगी यह लंबी होड़ ।।
 
 नाश जब -जब करोगे ।
तब -तब तुम मानव ,
प्रकृति का सामना करोंगे।
किसी न किसी ,
महामारी का सामना करोंगे। 
 
*प्रीति शर्मा "असीम",नालागढ़ हिमाचल प्रदेश
 

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