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पूछता है भाई
August 2, 2020 • ✍️अशोक 'आनन' • गीत/गजल
✍️अशोक 'आनन'
रो - रोकर  तुझसे , पूछता    है   तेरा  भाई ।
राखी  पर  क्यों  सूनी थी , मेरी  ये  कलाई ?
 
सपनों  में  भी  थी  न ,  मुझे  यह  कल्पना ।
मुझे  ही  भूल  जाएगी , मेरी  प्यारी  बहना ।
सदियों   की   तूने  ,  ये  रीत   क्यों  भुलाई?
राखी  पर  क्यों  सूनी थी , मेरी  ये  कलाई ?
 
बहनों को बाॅंधते हुए  ,  देखकर  ये  राखियाॅं ।
टप - टप टपकने लगीं ,  आंसू की ये लड़ियाॅं ।
बहन ! तूने आकर , क्यों  प्रीत  न ये निभाई ?
राखी  पर  क्यों  सूनी थी ,  मेरी   ये  कलाई ?
 
दुश्मन  की  भी  सूनी ,  न  रहे  कभी  कलाई ।
भाई  से  बहन, बहन  से  न  रूठे  कभी  भाई ।
बहन !  कभी  तुझे , न  भूल  पाएगा  ये भाई ।
राखी  पर  क्यों   सूनी  थी ,  मेरी  ये  कलाई ?
*मक्सी,जिला - शाजापुर ( म.प्र.)

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