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पिता
June 20, 2020 • रामगोपाल राही  • कविता
*रामगोपाल राही 
 
कितने हैं एहसान पिता के ,
गिनती करना मुश्किल है |
पिता ने  दायित्व  जो पूरे ,
किए बताना मुश्किल है ||
 
पिता घर आँगन के  आगे ,
नभ भी छोटा लगता है |
पिता के अस्तित्व के आगे ,
जग भी छोटा लगता है ||
 
गुण सूत्र पिता के होते ,
जिसे  मिटाना मुश्किल है |
रग रग में है पिता समाया ,
उसे भुलाना मुश्किल है ||
 
माता का सिंदूर पिता है ,
माता का सुहाग पिता |
जिसके ऊपर गर्व करे माँ ,
माता का सिरमौर पिता ||
 
पिता जनक है जीवन दाता ,
उसे भूलना मुश्किल है |
पिता छवि  हृदय में रहती 
वो बिसराना  मुश्किल है ||
 
नस नस फड़के पिता रक्त से 
खून उबालें भरता है |
गाली दे दे कोई पिता की ,
आंखों खून उतरता है ||
 
जन्म जन्मांतर साथ पिता का ,
रहता हरदम साथ पिता | 
लिखे नाम वहाँ नाम पिता का
पुत्र बताते नाम पिता ||
 
विद्यालय व प्रमाण पत्र में  ,
नाम पिता संग होता है |
दस्तावेज हो  शपथ पत्र ,
आत्मज लिखना होता है ||
 
सारी सृष्टि ढूँढ  -देखो ,
हित  चिंतक ना अन्य बड़ा |
आसमान सा विस्तृत होता ,
सच पिता का महत्व बड़ा ||
 
पिता आशीर्वाद से बढ़कर ,
कुछ भी जग में और नहीं |
पिता संभल स्नेह हमेशा ,
-रहे जरूरत और नहीं ||
*लाखेरी,जिला बूँदी (राज)
 

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