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फिर ये नजर हो न हो
November 8, 2019 • रूपेश कुमार • कविता

*रूपेश कुमार*
 
फिर ये नजर हो न हो ,
मै और मेरी तनहाई ,
नजर आएगी ,
तुम तेरा मुस्कुराता , 
चेहरा यू खिलखिलाता ,
नाम तेरा पूजते रहूं ,
फिर ये नजर हो न हो !
 
जिंदगी की खेल में ,
फूलों के मेल में , 
कलियों के साथ ,
गुलाबो के हाथ ,
तू मुझे सम्मान दो ,
या मुझे उफान दो ,
मै मिलेगा फिर तुमसे ,
फिर ये नजर हो न हो !
 
रात की बात में ,
दिन की याद में ,
दोस्तो के साथ में , 
हसीनाओं के हाथ में ,
आंख की आशुओ में ,
दिल की धड़कन में ,
याद आ जाए तुम ,
फिर ये नजर हो न हो !
 
*रूपेश कुमार,चैनपुर,सीवान बिहार ,मो0-9006961354
 

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