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फर्ज
May 11, 2020 • शोभा रानी तिवारी • कहानी/लघुकथा

*शोभा रानी तिवारी
 सात  दिन हो गए थे विभा बेटी जो 5 वर्ष की थी उसने कुछ खाया नहीं था। बस मम्मी के पास जाना है ,मम्मी के पास जाना है कह कर रोती जा रही थी। पास में ही उसकी सहेली सोनिया रहती है। दोनों एक साथ एक ही विद्यालय में पढ़ते हैं। जब सोनिया की मां को पता चला ,कि विभा मां से मिलने के लिए जिद्द कर रही है ,तो उससे नहीं रहा गया ,वह तुरंत विभा को अपने घर ले आई , उसे खाना खिलाया और मां से मिलाने का वादा भी किया। शाम के समय विभा को  मां के पास मिलाने हॉस्पिटल ले गई ,परंतु मां ने उसे दूर से ही देखा, क्योंकि ड्यूटी के दौरान और कोरोना के मरीजों की सेवा करते- करते वह चाहकर भी विभा से नहीं मिल सकी ।मन तो बहुत हो रहा था कि वह अपने जिगर के टुकड़े को गले से लगा ले, और जी भर कर प्यार करें।पर  वह  ऐसा ना कर सकी। विभा को देखकर भावविभोर हो गई। बहुत देर तक देखती रही ,और अश्रुधार बहने लगी।यह दृश्य देखकर आसपास के लोग सभी लोग रोने लगे। सोनिया की मां भी  रो पड़ी। तब सोनिया की मां ने प्रण किया ,कि जब तक विभा की मम्मी घर घर नहीं आ जाती ,तब तक उसे मां की कमी महसूस नहीं होने देगी ।क्योंकि जो लोग अपना घर-परिवार और अपनी खुशियों का त्याग करके कोरोना के मरीजों को बचाने में जुटे हैं ,तो हमारा भी फर्ज बनता है, कि हम उनके  परिवार की देखभाल करें ।और तब से विभा सोनिया  के घर पर है ।दोनों साथ खेलते हैं, खाते हैं और मस्ती करते हैं ।बीच-बीच विभा को  मम्मी से फेसबुक पर  मिलवा देती हूं।और दोनों खुश हो जाती हैं।
 
*शोभा रानी तिवारी, इन्दौर म.प्र
 

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