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पीड़ाओं का पर्याय है पिता
June 20, 2020 • अशोक 'आनन' • गीत/गजल
*अशोक 'आनन'
 
पीड़ाओं   का   पर्याय    है     पिता ।
लाचार   बहुत  असहाय   है   पिता ।
 
जर्जर   कंधों    पर    बोझा    ढोता  -
दीन - हीन - सा कृशकाय  है  पिता ।
 
जिससे सारे घर का दिल  धड़कता -
उस  घर  के लिए मृतप्राय है  पिता ।
 
प्रतिकूल मौसम में खड़ा जो  रहता-
अविचल  बरगद  समप्राय है  पिता ।
 
अपनों  का  जब  भी   मेला  भरता -
अपनों से तब  दु: ख लाय  है  पिता ।
 
उसके  मन  की  पीड़ा न जाने कोई  -
खूॅंटे से बॅंधा  खच्चर  प्राय  है  पिता ।
 
किसने  उसका  पढ़ा  यहाॅ  ' आनन ' -
घर   में  अपठित  अध्याय  है  पिता ।
*मक्सी ,जिला - शाजापुर ( म.प्र.)
 

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