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पर्यावरण
June 5, 2020 • रामगोपाल राही • कविता

*रामगोपाल राही
 
पर्यावरण का देश में हमसे 
अलख जगाना होगा ही |
महत्वपूर्ण - यह जीवन में ,
यह समझाना होगा ही ||
 
प्रदूषण से मुक्ति हेतु  -सच, 
हमको कदम उठाना है |
पर्यावरण को लील रहा यह ,
सब समझे समझाना है ||
 
धूल धुआँ दुर्गंध सभी कुछ ,
प्रदूषण फैलाते सब |
कचरा पालीथीन धरा का 
नित्य ताप  बढ़ाते सब ||
 
वन वनस्पति कटे  ,हुई सच, 
पर्यावरण की हानि नित | 
व्यापक हुआ प्रदूषण  जिससे,  
बढ़  जिससे हानि  नित ||
 
वन वनस्पति  जितने होंगे ,
पर्यावरण बढ़ेगा ही |
भू प्रकृति हरी भरी हो, 
जीवन सुकून मिलेगा ही ||
 
पेड़ प्रजाति वन वनस्पति ,
अभयारण्य  अति सुंदर |
यह धरती के आभूषण  हैं 
लगे प्रकृति  इनसे सुंदर ||
 
प्रकृति में हम से पहले ,
पेड़ ही आए जाने सब |
सुंदरता संग हवा साथ में 
पेड़ ही  लाऐ  माने सब ||
 
बिना पेड़ पौधों के समझो 
प्रकृति सूखी  लगती है |
पर्यावरण भी हो प्रभावित ,
सृष्टि  सूखी लगती है ||
 
प्राणवायु पेड़ों से मिलती ,
सबका जीवन पेड़ों से |
फेफड़ों में प्राणी मात्र को ,
हवा मिलती पेड़ों से ||
 
प्रकृति -पर्यावरण सुरक्षा ,
 होती समझो पेड़ों से |
 शुद्ध हवा मिलती है सबको |
मिटे  प्रदूषण पेड़ों से ||
 
प्रकृति पर्यावरण भूमि का ,
रहे समन्वय कुदरत में |
हवा पानी शुद्ध रहे सच, 
पर्यावरण संग  कुदरत में ||
*लाखेरी
 

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