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पावस की शालाएं 
July 11, 2020 • अशोक ' आनन '  • गीत/गजल

*अशोक ' आनन ' 

बूॅंदों  के  बस्ते  लेकर -
घर से निकले बादल ।
 
पावस  की  फ़िर -
खुल गईं शालाएं ।
गणवेश   में    हैं -
बिजली- बालाएं ।
 
संभल सके न कीच में -
झट से फिसले बादल ।
 
मोर   ,    पपीहा -
झींगुर  ,  दादुर ।
शाला  आने  को -
दिखते   आतुर ।
 
तड़ी मारकर हफ़्तों गायब -
रहते   ,   पगले      बादल ।
 
पढ़ाई ज़रा भी न की इनने -
बज गई छुट्टी की घंटी ।
गिरते ,पड़ते चले ये नभ से -
सूखे  में  डूबे आकंठी ।
 
पानी  के न जाने कितने -
करते    घपले ,   बादल ।
 
*मक्सी, जिला - शाजापुर ( म.प्र.)
 

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