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निःस्वार्थ महादान रक्तदान
June 13, 2020 • डॉ. रीना मालपानी • कविता
*डॉ. रीना मालपानी
रक्तदान समतुल्य होता जीवनदान, 
अनगिनत जरूरतमंदों के लिए महादान।
जब न हो पाता अपनों से समस्या का निदान, 
तब यही बन जाता अपनों के लिए वरदान।
दे सकता जरूरतमंद के जीवन में योगदान, 
अनजाने में ही सही क्यों न करे
किसी की कठिनाई का समाधान।
एक समय में किए गए रक्तदान का मोल, 
बनाता तीन लोगों का जीवन अनमोल।
रक्तदान रूपी कार्य है महान, 
किसी असहाय की बचा सकता है जान।
रक्तदान की क्रिया है सहज सरल और आसान, 
जरूरत के समय में है संजीवनी बूटी समान।
रक्तदान ला सकता है किसी के जीवन में उपहार, 
मरीज के स्वास्थ्य में लाता निरंतर सुधार।
समाज की भलाई के लिए करना है रक्तदान का आह्वान, 
सही उम्र वजन और हीमोग्लोबिन का जब हो ज्ञान।
थैलिसीमिया एवं अन्य बीमारी में होती रक्त की नियमित जरूरत, 
तब निष्काम कर्म होता सार्थक अनवरत।
दुर्घटना, एनीमिया एवं सर्जरी में होती तत्काल आवश्यकता, 
तब आपका रक्तदान किसी की करता सहायता।
नेक कार्यों से मानव हमेशा पाता है सम्मान, 
स्वेच्छा से किया निष्काम कर्म है यह; नहीं है एहसान।
अनायास लड़ते हम जात-पात के नाम पर, 
रक्त की कोई जाति नहीं होती मगर।
कुछ क्षणों का निःस्वार्थ सहयोग, 
किसी अजनबी की जिंदगी में आ सकता उपयोग।
रक्तदान करते वक्त हम होते अनजान, 
पर निश्चित ही हम अपना प्रारब्ध करते बलवान।
महर्षि दधिचि ने किया था हड्डियों का दान, 
हम तो केवल रक्त की कुछ बूंदें देकर करते मानवता में योगदान।
महीप दिलीप ने किया था गौ रक्षा के लिए स्वयं का बलिदान, 
जीवन दाता बनकर बचाइए किसी की संतान।
ज्योतिषीय पक्षों से यह मंगल को बनाता बलवान, 
सारे किन्तु परंतु छोडकर बनिए परोपकारी इंसान।
रक्त बनाने का नहीं है कोई अतिरिक्त विकल्प, 
14 जून के दिन ले रक्तदान का दृढ़ संकल्प।

*नागदा ज. (म.प्र.)

 

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