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नशा है मृत्यु को न्यौता
June 25, 2020 • राम गोपाल राही • कविता

*राम गोपाल राही

नशा है मृत्यु को न्यौता, नशे की मार होती है |
नशीली ज़िन्दगी समझो, बहुत बेकार होती है ||
 
सुरा पी जी रहे जो भी ,सुरा पी जाएगी उनको  | 
जो आदत गम भुलाने की ,दगा दे जाएगी उनको||
नशीली कोई भी वस्तु ,जहर की धार होती है  |
नशीली जिंदगी समझो ,बहुत बेकार होती है ||
 
 नशा जब रोग बन जाता, नहीं उपचार से जाता |
नहीं इसकी दवा कोई , यह मरने पर ही जा पाता |
नशा  वो रोग की जिससे . क्षति अपार होती है |
नशीली जिंदगी समझो बहुत बेकार होती है ||
 
 न जीवन संतुलित रहता ,घटे जीवन की क्षमताएँ |
संभल  न जिंदगी पाती ,  हो पग पग पर विषमताएँ ||
न वश में  र्जिन्दगी खुद के ,विवश लाचार होती है |
नशीली  जिन्दगी समझो ,बहुत बेकार होती है ||
 
नशा घर बार धन दौलत ,करे चौपट तबाही दे |
नशा कर जी रहे उनकी ,कहानी यह गवाही दे ||
 नशे में विष की यूँ मानो,  बड़ी भरमार होती है |
नशीली जिंदगी समझो ,बहुत बेकार होती है ||
 
नशा जीवन में घातक है ,यह भारी चोट करता है |
करे घायल यह घर बैठे ,कई कर खोट देता है ||
नशे से मृत्यु  यूँ समझो ,खड़ी घर द्वार होती है |
नशीली जिंदगी समझो ,बहुत बेकार होती है ||
 
नशा यमराज का भेजा ,छले यमदूत बन आता |
 न पथ यमदूत का रुकता ,यह जीवन साथ ले जाता |
हो घर में मौत सन्नाटा ,दुखों की मार होती है |
नशीली   जिंन्दगी समझो , बहुत बेकार होती है ||
 
नियम शराबबंदी का ,अमल हो मुल्क में सारे |
बचे  नर . सहस्त्र मृत्यु से , शराबी नर जो बहुसारे |
व्यसन शराब का छूटे ,विषम शराब होती है |
नशीली जिंदगी समझो ,बहुत बेकार होती है ||
 
लाखेरी,जिला बूँदी (राज)
 

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