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नकारात्मक विचार धीमा जहर
April 26, 2020 •  डॉ अरविन्द जैन  • लेख

 *डॉ अरविन्द जैन 

मानव स्वाभाव हैं कि वह हमेशा मोह के वशीभूत होकर किसी से राग करता हैं या किसी से द्वेष  करता हैं ।आपने कभी तराज़ू देखी होगी उसमे जो पलड़ा भारी होता हैं, वह नीचे की ओर जाता हैं और जो हलका  होता हैं वह नीचे की ओर जाता हैं। जब हम कोई सामग्री खरीदते हैं, तब तुला के दोनों पलड़े समान होते हैं तभी लेते हैं ।इसी को हम समत्व भाव, वीतराग भाव, अहिंसात्मक भाव कहते हैं । इस अवस्था में हम किसी भी पक्ष में नहीं रहते पर संतुलित रहते हैं। वर्तमान में हमारे जीवन इतना अधिक संघर्षशील हो गया हैं या बना लिया हैं या बन गया, की व्यक्ति, परिवार, समाज ओर देश में नकारात्मकता का दौर चल रहा हैं ,यह क्या हैं इसको समझाना ओर समझना जरुरी हैं तभी हम सकारात्मकता की बात समझेंगे ।

ऊर्जाएं क्या होती हैं?

दुनिया में दो तरह की ऊर्जा पाई जाती हैं, एक सकारात्मक और दूसरी नकारात्मक। हम जिस तरह के वातावरण में रहते हैं हमारे आसपास वैसी ही ऊर्जा का प्रवाह होने लगता है। यदि हमारे विचारों में नकारात्मकता घुल जाती है तो इसका प्रभाव धीरे-धीरे हमारी आत्मा पर भी पड़ने लगता है। ऐसा होने पर आत्मा बुरी तरह थक जाती है और हमारे अंदर शारीरिक और मानसिक लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

नकारात्मक विचार

नकारात्मक विचार इतने खतरनाक होते हैं कि वह हमारे अंदर मौजूद सकारात्मक ऊर्जा पर भी बुरा प्रभाव डालने लगते हैं। आपने अक्सर ऐसे लोगों को अपने आसपास देखा या महसूस किया होगा जो हर वक्त सिर्फ नकारात्मक ही सोचते हैं। ऐसा वो जानबूझकर नहीं करते बल्कि उनकी आत्मा पर नकारात्मकता हावी हो चुकी होती है।

आत्मा पर भी होता है बुरा असर

इस मामले में कई जानकारों का मानना है कि ऐसा एकदम से नहीं होता। नकारात्मक ऊर्जा आत्मा पर तब हमला करती है जब व्यक्ति चारों तरफ से निराश और नकारात्मक हो जाता है। ऐसे में कई लक्षण दिखाई देते हैं जिन्हें आप आसानी से पहचान सकते हैं। शायद इन लक्षणों को जानने के बाद आपको अपने आसपास ही कई लोग ऐसे मिल जाएं जिन्हें फौरन मदद की जरूरत हो।
यह कभी नहीं रहेगा

जब हम किसी नई जॉब या रिलेशनशिप में आते हैं और सब कुछ ठीक चल रहा होता है तो सभी को खुशी होती है लेकिन नकारात्मक लोग इससे खुश नहीं होते। वह अपना हर दिन खुशी से बिताने की बजाय ये सोचने में गंवा देते हैं कि यह खुशी हमेशा के लिए नहीं है। कब यह सब कुछ खत्म हो जाएगा पता नहीं। आज जो है वह कल नहीं होगा। यही विचार उनकी आत्मा को धीरे-धीरे कमजोर बनाने लगता है क्योंकि वह आज के अच्छे पलों को कल गंवा देने के डर से वर्तमान को नहीं जी पाते और घुटने लगते हैं। ऐसे लोग आपकी जिंदगी को भी परेशानी में डाल सकते हैं क्योंकि ये लोग आपको भी यही ज्ञान देने लगते हैं कि “ज्यादा खुश मत हो, क्या पता कल नौकरी छूट जाए या रिलेशनशिप टूट जाए।”

बीते हुए कल में अटके रहना

बीता हुआ कल या जिसे हम पास्ट कहते हैं, हमारे जीवन का हिस्सा जरूर हो सकता है लेकिन जब वह हमारा जीवन बन जाता है तब समझिए आप नकारात्मकता से घिर चुके हैं। बुरा वक्त सबका आता है लेकिन उसे भुलाकर आगे बढ़ने में ही समझदारी है। जरूरत है बीते हुए कल से सबक लेने कि ना कि उस कल को याद कर वर्तमान खराब करने की। नकारात्मकता का शिकार हुए लोग अक्सर अपने बीते हुए कल में अटके दिखाई देते हैं। आप उन्हें लाख समझाने की कोशिश कर लें लेकिन वह उसे भुला नहीं पाते। यही वजह है कि ऐसे लोगों की आत्मा बीते हुए कल की कैद में दम तोड़ने लगती है और उनके पूरे व्यक्तित्व को।

दूसरों को जज करना

वो ऐसा है, वो वैसी है…।या उसे ये नहीं करना चाहिए था…।ऐसी बातें आपने अक्सर लोगों के मुंह से सुनी होंगी। हम सबकी आदत है दूसरों में कमी निकालने की या बिना मतलब उन्हें राय देने की। यह आदत सभी में होती है। अब आप सोच रहे होंगे, तो फिर सभी नकारात्मक विचार वाले लोग हैं? नहीं ऐसा नहीं है क्योंकि यदि आप किसी को नीचा दिखाने के मकसद से ऐसा कर रहे हैं या फिर उनके बारे में नकारात्मक छवि बनाने के लिए गॉसिप कर रहे हैं तभी आप नकारात्मक कहलाएंगे। यदि आप सिर्फ अपनी राय के तौर पर किसी के बारे में कुछ कह रहे हैं तो यह इससे बहुत अलग है।

तारीफ के बदले धन्यवाद नहीं करना

यदि कोई आपकी तारीफ कर रहा है तो आपका जवाब क्या होगा? आम सी बात है कि आप उसे धन्यवाद कहेंगे। लेकिन आप अगर ऐसा नहीं कर रहे हैं तो समझिए आपकी आत्मा में नकारात्मकता घुल चुकी है। ऐसे लोग दूसरों की तारीफ को तवज्जो नहीं देते। वो अपने आप को सबसे ऊपर मानकर उन्हें धन्यवाद ना करने में अपनी शान समझते हैं।

हमेशा नकारात्मक विचार ही आना

अक्सर आपने कई लोगों को देखा होगा कि वह किसी भी परिस्थिति में फिर चाहें वह अच्छी ही क्यों ना हो नकारात्मक बात ढूंढ ही लेते हैं। उदाहरण के लिए, ऐसे बहुत लोग हैं जो ट्रेन या कार में बैठते ही सोचने लगते हैं कि कहीं एक्सीडेंट हो गया तो क्या होगा। सतर्क रहना अच्छी बात है लेकिन हमेशा नकारात्मक विचारों से घिरे रहना और अच्छे वातावरण में भी नकारात्मक विचारों को लाना सही नहीं है।
नकारात्मक सोच वालों के लिए यह सोचना जरुरी हैं की हमारा जीवन संगीतपूर्ण हैं ,सौन्दर्य ओर आनंद पूर्ण हैं ,जो सकारात्मक सोच रखते हैं उनके  लिए जीवन सौन्दर्यपूर्ण होता हैं ,उनके अंतर् -हृदय में संवेदना ओर करुणा का सुवास होता हैं ,ऐसा व्यक्ति जीवन के हर पल जीता हैं ,वह जीवन नहीं काटता हैं ,बल्कि वह जीवन को मंगलमय बनाता हैं ।ऐसा व्यक्ति जीवन में हमेश उत्साहित होता हैं ओर अन्यों को उत्साहित करता हैं ।उसमे एक धनात्मक ऊर्जा प्रवाहित होती हैं ,वह अपने मन मस्तिष्क को नगर निगम का कचरा घर नहीं बनाता ,बल्कि वह सुवास फैलता हैं ओर ऊर्जावान रहता हैं ।

आगे के या हाल के,जो हैं दुःख अथाह ,

उनसे रक्षक के सखा,बनो सदा सोत्साह ।

तुम जिन कठिनाइयों में फंसे हुए हो ,उनको जो लोग दूर कर  सकते हैं ओर आने वाली बुराइयों से जो तुम्हे बचा सकते हैं ,उत्साहपूर्वक उनके साथ मित्रता करने की चेष्टा करो।


*डॉ अरविन्द प्रेमचंद जैन, रोड ,भोपाल

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