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नारी ! ममता की एक प्रतिमा
November 24, 2019 • सुरेश शर्मा • कविता

*सुरेश शर्मा*
युग -युगांतर  से ,सदियो से ही ,
मातृत्व अधिकार  की सम्मान  लिए,
इस  धरती पर जन्म  लेने वाली  नारी ।
ममता की मूर्तिं ,ममता  की  देवी ।
आज  हमारे  समक्ष ही,
लज्जित और प्रताड़ित होती है।

आज हमारे  बीच  से  ही ,
किसी  एक   की असामाजिक ;
आचरण की  वजह से ।
आज ममता की कोमल अहसास ,
से सुसज्जित  नारी ;
लज्जित और अपमानित होती है।

नारी एक  सहनशीलता  का सुंदर  नाम !
ममता की एक अद्भुत  प्रतिमा ,
जिनकी  अहसास  की अनुभूति से ;
जिनके  नाम  लेने से ही मन मे ,
श्रद्धा भरी प्यार  जाग उठती है ;
मातृ  के रूप  मे पाकर ।

नारी  एक सुकोमल  नाम ,
प्यारी सी-फूलों की सुगंध  की तरह ,
जिसके लिए  मन के आंगन  मे ;
ममता  की सुगंधित  खुश्बू ,
फूलो सी खिल उठती है ;
बहन के रूप  मे  पाकर  ।

नारी  एक  मधुर  मिठास का नाम ,
गहरी  विश्वास  की मूरत ;
जिसे  देखने भर से ही ,
हृदय  के अन्दर अडिग विश्वास ,
मुख मुद्रा पर मुस्कान बिखर जाती है ;
जीवन संगिनी  के  रूप  मे पाकर  ।

नारी  एक  कोमल अनुभव  का नाम ,
जिसकी  अनुभूति  से ;
हमारे  मन मस्तिष्क के  पटल पर ,
मन का प्रेम प्रफुल्लित  हो उठता है ।
स्नेह की खनखनाहट  बज उठती  है ,
कन्या  संतान  के  रूप  मे  पाकर  ।

सहनशीलता  की देवी होने के बावजूद नारी ,
आज लज्जित होती है !
अपमानित  होती  है !
प्रताड़ित  होती  है !

आज हमारा समाज  स्तब्ध कयों  है ?
क्या  आज  हमारा  समाज निष्ठुर हो गया  है ?
क्या  हमारा समाज  हमे उत्तर  देने  की !
जिम्मेदारी  ले सकती  है ?
शायद  नही !
कभी  नही !

*सुरेश शर्मा,शंकर नगर,नूनमाटी गुवाहाटी,आसाम,मोबाइल- 8811033471

 
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